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Govind · Transcript · · Updated

जिस जगह गाय रहती है उस स्थान का चमत्कार सुनो !! – Transcript

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Summary

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  • मनुष्य की विकृत मानसिकता और अहंकार ने परमात्मा द्वारा बनाई गई अत्यंत सुंदर प्रकृति को असुंदर बना दिया है।
  • भारतीय देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से दूषित जल का शुद्धिकरण किया जा सकता है।
  • महाभारत के श्लोक के अनुसार जहाँ गायें निर्भय होकर श्वास लेती हैं, वहाँ का वायुमंडल पवित्र होता है और संपूर्ण पाप समाप्त हो जाते हैं।
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Transcript

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बुद्धि पर मन का नियंत्रण नहीं है। मन पर बुद्धि का नियंत्रण है। बुद्धि कहते किसको हैं? पूज्य गुरुदेव भक्तमाली जी कहते हैं कहते थे कि जो मन की नाक में नकेल डाल के रखे उसका नाम है बुद्धि। नकेल डालना समझते हो?

जिस पशु के नकेल पड़ जाती है न कैसे करो फिर हिल नहीं सकता वो पशु। मन के ऊपर बुद्धि का नियंत्रण है। मन से सूक्ष्म बुद्धि है और बुद्धि से सूक्ष्म आम है। बुद्धि से सूक्ष्म आम है।

तो ख मनो बुद्धि रेवच अहंकार में भिन्न प्रधा गाय की भाई साहब सबसे बड़ी जो महिमा है वह यह है कि जहां वेद लक्षणा भारतीय देसी गाय

स्थूल प्रकृति का शोधन करती है वही वह सूक्ष्म प्रकृति की भी शोधिका है। यह विशेष बात है। आज स्थूल प्रकृति विषाक्त हो रही है। पर्वतों को खोदे तो जा रहे हैं। कहने को हम ब्रजवासी हैं पर भगवान के

लीलाएं जहां हुई उन पर्वतों को हम खोद रहे हैं। पर्वतों का खनन कर रहे हैं। यह पर्वत नहीं है। परम पूज्य रमण रीति वाले महाराज जी का वाक्य है। ब्रज के जितने पर्वत हैं सब गिरिराज गोवर्धन है। सब गिरिराज जी के स्वरूप हैं। ब्रज के

जितने वृक्ष हैं सब वृंदावन का स्वरूप है। इसलिए ब्रज के किसी पर्वत का तिरस्कार गोवर्धन का तिरस्कार गिरिराज जी का तिरस्कार है। और ब्रज के किसी भी वृक्ष का तिरस्कार उसको काटना वो वृंदावन को नष्ट करने का पाप है। आज

धरती विषैली पर्वत नष्ट हो रहे हैं। नदियां दूषित हो रही हैं। वृक्ष कट रहे हैं। वायुमंडल विषाक्त हो रहा है। आकाश की भी अवस्था अच्छी नहीं है। गणेश जी आकाश की भी अवस्था अच्छी नहीं है।

इतना प्रदूषण आकाश में है। जब हम एक प्रदूषण के मंडल से बाहर निकलते हैं हवाई जहाज की यात्रा के माध्यम से उस समय जो एकदम नीला नीला आकाश दिखाई पड़ता है तो लगता है अरे यह आकाश है। पूरा आकाश दूषित है।

इस परमात्मा की बनाई हुई अतीव सुंदरी प्रकृति को असुंदर किसने बनाया? विषाक्त किसने बनाया? नष्ट भ्रष्ट किसने किया? इसका उत्तर क्या है? इसका उत्तर है हम मनुष्यों ने किया। तो ईश्वर की सृष्टि की सर्वोत्कृष्ट रचना मनुष्य शरीर है। फिर परमात्मा की सबसे

उत्कृष्ट रचना जो मनुष्य है उसने इतना बड़ा पाप क्यों किया? इसका उत्तर है कि मनुष्य तभी कुछ उटपटांग करता है जब उसका मन विकृत होता है। जब उसकी बुद्धि विकृत हो जाती है। जब उसका अहम बिगड़ जाता है। तब वह कुछ ना कुछ करता है।

आपका दिमाग एकदम सही है तो आप शांति से इस हॉल में वातानुकूलित हॉल में बैठे आपके दिमाग पर गर्मी चढ़ जाए तो छत पर जाकर कूदने की जरूरत है फिर कोई बचाने वाला नहीं एक बरसाने में महात्मा थे बहुत अच्छे महात्मा थे पर दिमाग गम हो गया

कोई तंत्र मंत्र के चक्कर में पड़ गए दिमाग गम हो गया तो गवर वन का जो कुआ है ब्रह्मचारी जी वाला कुआ बहुत गहरा कुआ है उस कुए में कूद गए जबकि कुए में महाराज जाल लगा हुआ था जाल का ढक्कन खोल के कूदे वो और उतने गहरे कुए में कूदे तो स्वाभाविक है कि मरने के अलावा और क्या मर गए अधोगति

हुई बाद में उनके कल्याण के लिए फिर कुछ अनुष्ठान हुआ तब उनका कल्याण तो महात्मा तो पुराने महात्मा थे। पढ़े लिखे थे। कोई बहुत ऊंची पढ़ाई पढ़ के तब साधु बने थे वो। तो इतने पढ़े लिखे बुद्धिमान व्यक्ति ने आत्महत्या क्यों कर ली? दिमाग गम हो गया।

तो मनुष्य का मन बिगड़ जाए, मनुष्य की बुद्धि बिगड़ जाए तो कुछ भी कर सकता है। इस विकृत मानसिकता वाले विकृत बुद्धि वाले विकृत अहंकार वाले मनुष्य ने परमात्मा की बनाई हुई अत्यंत सुंदर प्रकृति को असुंदर बना दिया। अशोभनीय बना दिया। और जब हमने प्रकृति को नष्ट किया

तो हम बच पाएंगे क्या? प्रकृति नष्ट होगी तो हम भी नष्ट हो जाएंगे। आज इस बार पूरे संसार में कितना विप्लव हुआ है प्रकृति का। कितने भूस्खलन हुए, कितने बादल फटे, कितना जगह आग लगी।

हम प्रकृति को नष्ट कर रहे हैं तो प्रकृति भी हमें छोड़ने वाली प्रकृति हमको नष्ट कर रही है। अरे हम नवदुर्गा के रूप में किसकी उपासना कर रहे हैं? इस शारदी नवरात्रि के रूप में प्रकृति की अधष्ठात्री भगवती जगत जननी जगदंबा मूल प्रकृति प्रधान प्रकृति हम उसी की तो उपासना कर रहे हैं।

और भाई गाय की सबसे बड़ी महिमा है वो धरती को विशेष मुक्त करती है अपने गोबर गोमूत्र से जल को शुद्ध करती है। हमारे खाक चौक में कुआ है। छोटी कुया है। मूल पुरुष पहाड़ी बाबा महाराज के द्वारा स्थापित

213 वर्ष तो पहाड़ी बाबा को समाधि लिए हो गए जीवित समाधि लिए हुए यह जो कार्तिक पूर्णिमा आएगी उस पर 214वा समाधि दिवस होगा पहाड़ी बाबा का उनके काल में स्थापित वो कुिया थी उसका पानी बिगड़ गया

तो महाराज जी नाट लीला करते थे पूज्य गुरुदेव पहाड़ी बाबा हमसे बोले अरे भाई तुम तो पंडित हो ये कुआ का पानी बिगड़ गया बोलो कैसे हुआ ठाकुर जी की रसोई पूजा सब इसी से होती है ठीक करो उसको अब हम क्या जाने कैसे ठीक होगा तो हमने एक डॉक्टर से पूछा उन्होंने एक पुड़िया की दवाई दे दी लाल दवाई

वो पुड़िया डाल ते पूरा पानी लाल हो गया। उसमें दुर्गंध और आने लगी। कीड़े मर गए होंगे। दुर्गंध आने लग गई। तो महाराज जी ने कहा अरे तुमने तो और सत्यानाश कर दिया कुया का। और कुछ उपाय करो। तो एक वैद जी मिल गए। यहां वैद जी कोई बैठे हो तो बुरा नहीं माना।

उन वैद जी ने कोई वैद जी तो नहीं बैठे हैं। अब बैठे होंगे तो बताएंगे नहीं कि हम वैद जी हैं। अच्छी बात बोल रहे हैं। कोई खराब बात नहीं बोल रहे। सही बात है। एक वैद्य जी ने कहा कैसा भी पानी बिगड़ा हुआ हो चू चुना डाल दो तो चू चुना से पानी साफ हो जाता है। हम लोग गौशालाओं में गाय की लड़ावनी में चू चुना पोते हैं। उसमें पानी भरते हैं।

चू चुना डालते हैं। जिससे पानी बैक्टीरिया रहित हो जाए और गायों को कैल्शियम भी मिले। उनकी हड्डियां भी पुष्ट हो। अपने यहां देखना पूरे गौशाला में सब जगह तो उन्होंने कहा किना डाल दो हम सोचे भाई इतना बड़ा कुआ है इतना पानी है कम से कम 20 हाथ पानी होगा चलो डाल देते हैं तो हम 101 किलो चू चुना ले

आए और हमने ढोल डाल दिया बज बज बज बज करके एकदम उबलने लगा चू चुना अब पानी और पहले तो दुर्गंध गंध आई थी लाल था अब कड़वा और हो गया इतना चुना पड़ते वो कड़वा हो गया महाराज जी बोले है तेरी जय तेरी सब कुिया का सत्यानाश कर

दिया है पोथी के पंडित है व्यवहार में कुछ नहीं पता है पोथी के पंडित है कुछ नहीं जानते व्यवहार में पोथी के पंडित है ऐसे एक बात को कई बार दोहराते थे उनका अभ्यास था तो मैं मैं हाथ जोड़ के कहा महाराज जी हम तो अब थक गए हम तो जानते नहीं कैसे जैसा जैसा लोगों ने बताया हम करते चले गए और

वैसा हो हम क्या करें हमने कहा अब महाराज जी आप बताइए उपाय तो विद्यार्थियों से बोले हे भला गोमूत्र बाल्टियों में इकटठा करो तो गैया का मूत्र इकटठा कर लिया बाल्टियों में ताजा गोबर उठाओ और गोबर गोमूत्र को घोल आया

और घोल करके आठ द बाल्टी गोबर गोमूत्र घोल के उसी में डाल दिया तो हम अपने मन में क्या सोचे कि अब हुआ काम अब रहा सहा और यह गोबर सड़ जाएगा गोमूत्र गोबर है अब तो और खराब हो गया मन में हमने सोचा बस डर के मारे बोला नहीं

24 घंटे तक कुछ नहीं महाराज बोले 24 घंटे के बाद बोले निकालो पानी निकालो इसका सब पानी निकालो तो बाल्टियों से हम लोग खींच खींच कर कुया का पानी निकालने लगे सारा पानी निकाल दिया बोले एक बच्चे को उस बाल्टी में बिठाओ जो हल्के वजन का हो कुआ में भेजा उसको ए बच्चा नीचे जितना गोबर हो, चूना हो, वह

सब निकाल के बाल्टी में भर भर के ऊपर भेजो। नीचे बालू निकल आवे। एक छोटा बच्चा था उसको बाल्टी में बिठा के नीचे पहुंचा दिया गया। आठ द बाल्टी द 20 बाल्टी होगा। कुछ निकला कचरा। इसके बाद उसको बाल्टी में बिठाकर बाहर निकाल लिया। और निकालने के बाद

दूसरे दिन अब पानी तो पूरा खाली हो गया। दूसरे दिन नया स्रोत आया तो महाराज बोले अरे भाई बड़ी जोर की प्यास लग रही लाओ पानी लाओ पानी लाओ पानी लाओ कहां से पानी लाए खींचो कुिया से खींचो पानी झिर आ गई होगी पानी खींचो पानी खींचा एकदम बढ़िया निर्मल जल हम सोच रहे थे कि कुछ ना कुछ

कड़वाहट तो इसमें होगी पर महाराज जी ने जल खूब राम जी को मन ही मन भोग लगाया। तृप्त होकर जल पिया और सबको कहा कि जल पियो। आज तक उस कुिया का जल अमृत के जैसा है। आज तक अभी भी है। आप जाकर चेक करके देख लेना, पी कर के देख लेना। अभी भी उसमें जल है। यह घटना

Frequently asked questions

मनुष्य का मन, बुद्धि और अहंकार जब विकृत हो जाता है, तब वह प्रकृति को नष्ट कर देता है।

गुरुदेव ने बाल्टियों में ताजा गोबर और गोमूत्र का घोल कुएं में डालने का उपाय बताया जिससे पानी पूरी तरह निर्मल हो गया।