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Rutba EP 6 | 26 Oct 2026 | Hiba Bukhari | Talha Chahour | Zahid Ahmed | Mehwish Hayat | ARY Digital – Transcript
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Summary
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- दो पुलिस वालों के नाके पर शूट होने के बाद विभाग के पास खराब असला होने और सीमित संसाधनों की बात सामने आती है।
- मानूर नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाती है और पुलिस में एएसपी पति होने का जिक्र करने पर उसे जॉब मिल जाती है।
- हादी शहर की सरकारी जमीनों पर कब्जे करने वाले मीर साहब और शहर की जमीनों के मामलों के बारे में चर्चा करता है।

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Transcript
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मुझे दिल के पास [गाना गाने की आवाज़][संगीत] रख ले। मुझे अपने रंग में [गाना गाने की आवाज़] रंग ले। अस्सलाम वालेकुम सर। सर सर हमारे दो पुलिस वालों को नाके पे किसी ने शूट कर दिया है। व्हाट?
कैसे हैं आप दोनों? ऑन द स्पॉट डेथ हो गई है सब तुम [संगीत] [संगीत] [संगीत]
[संगीत] हमारा तो वाहिद कमाने वाला चला गया। पांच बच्चियां, एक बेटा हमारा तो सब कुछ चला गया।
पुलिस डिपार्टमेंट आप लोगों के साथ मुझे डीपीओ साहब ने खास तौर पर हिदायत की है कि आपको और शहीद के बच्चों को हर तरह की सहूलत दी जाए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या सहूलत दी जाए? बच्चे-बच्चियां यतीम हो गए। हमारा सहारा भी चला गया।
कुछ भी नहीं मिलता जी। हमारे मोहल्ले में दो पुलिस वाले मर गए थे। थोड़े-थोड़े पैसे देकर फारग कर देते। इस पर भी खानदान वाले लड़ाईयां लड़ते रहते हैं। कितने दिन से डिपार्टमेंट वालों को लिख कर भेजा हुआ था कि गंस खराब है। लेकिन वहां से कोई जवाब ही नहीं आता। वसाइल महदूद होने का बोल दिया जाता है। पर
आप यह देखिए अगर गंस ठीक होती तो उस ट्रक वाले की चार नहीं आठ लाशें यहां पड़ी होती। क्यों?
बिल्कुल ऐसे ही है सर। हमारी भी ऐसे ही किसी दिन खबर लग जाएगी। मुजरिमों के पास बेहतरीन असला है सर। हमारे पास ना असला है ना मोटिवेशन है। कुछ भी नहीं है सर।
मुझे पता है तुम्हें बड़ी हमदर्दी हो रही है। मुझे भी है हमदर्दी लेकिन अब कहां से पूरी करें असले की रिक्वायरमेंट्स?
लिमिटेड रिसोर्सेज हैं। डिपार्टमेंट के हालात तुम्हें पता ही है। सर फैसिलिटीज तो मुझे ही चाहिए था। हां तो कोशिश कर रहे हैं ना। सर अगर वीआईपी ड्यूटी से हटाकर नफरी यहां लग जाए तो वीआईपीस की बात मत करना। ओके।
वैसे मुझे समझ नहीं आ रही कि मैं कैसे अपने जवानों को मोटिवेट करूं। इन हालात में नाके पर खड़े होकर ड्यूटी देने पर। जैसे तुमसे पहले अफसर मोटिवेट करते थे। ज्यादा जज्बाती होने की जरूरत नहीं है। ये सब नॉर्मल रूटीन की बातें हैं। लेकिन मुझे सिर्फ ये कहना
ज्यादा जज्बाती होने की जरूरत नहीं है। ये सब नॉर्मल रूटीन की बातें हैं। हां हां आ रहा हूं मैं। क्या हुआ?
बस यार अपसेट होने दो कांस्टेबल्स की वजह से। इस बात को तो दो-चार दिन हो गए ना। आज इंक्वायरी रिपोर्ट आई है तो पता चला कि जो असला हमारे जवानों के पास था वो काम ही नहीं कर सकता था। इतने दिनों से वो बार-बार हमें असला का कह रहे थे।
लेकिन हम [संगीत] कभी कुछ कह रहे थे कभी कुछ। दैट्स रियली सैड। गैर असलेल के पुलिस नावों पर क्या करेगी?
मरेगी और क्या करेगी? मजाक उड़ाना ना बड़ा आसान होता है पुलिस वालों का। आम आवाम को पता चले ना कि किन हालात में ड्यूटी कर रहे हैं तब जाके एहसास हो। शायद तब भी एहसास ना हो। शादी प्लीज। तुम अपसेट मत हो। क्यों अपसेट कहूं यार? मेरे जवान थे, मेरी फोर्स के लोग थे।
नो आई नो आई नो मानो मैं उनके घर होकर आया हूं। इतनी गुरबत है। इतनी गुरबत है कि यार 10-10 121 लोग डिपेंडेंट थे उन पर। एक-एक दो-दो कमरे के घर एक्सीडेंटल डेथ में मरने वालों का हमारा डिपार्टमेंट जितने पैसे देता है ना, उससे
कुछ नहीं होता। बस फैमिलीज आपस में लड़ती हैं। खौर कौन होता है? बीवी और बच्चे। क्या कह रहे थे तुम?
मेरे अब्बा प्रोफेसर हैं। एक गवर्नमेंट जॉब में क्या हर्डल्स होती है वो सब जानती हूं मैं। सब कुछ सेफ काम होता है प्रोफेसर की बेटी का। प्रोफेसर को कोई रोड पर शूट नहीं कर जाता। और अगर कोई कर भी जाए तो सवाल होते हैं,
रेफरेंसेस होते हैं। हमारी जॉब के साथ अटैच होता है मरना। मर जाएंगे तो क्या होगा? कल को कोई दूसरा आके हमारी जॉब पर खड़ा हो जाएगा। बड़ी सस्ती होती है हमारी जिंदगी।
और इसीलिए कि शायद हम आम आदमी की जिंदगी को सस्ता समझ कर ट्रीट करते हैं। मैंने आज से पहले तुम्हें इतना परेशान कभी नहीं देखा। देखा करोगी।
तुम जाग रही हो। तबीयत ठीक है तुम्हारी? पहले तुम परेशान थे। अब मैं परेशान हूं।
आज से पहले मैंने तुम्हें कभी इतना टेंस नहीं देखा। यार उस वक्त हो रहा था जज्बाती। इसीलिए मैं तुमसे ऑफिस की बातें शेयर नहीं करता।
क्यों? क्यों शेयर नहीं करोगे? मुझसे शेयर नहीं करोगे तो किससे करोगे? ताकि तुम सारी सारी रात सोने के काबिल ही ना रहो। सो जाओ यार। ये तो दिन रात का मसला है।
सो जाओ। हां दी। हम एक बात पूछूं तुमसे? हां तुम रिग्रेट कर रहे हो। किस चीज का?
तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि मैं रिग्रेट कर रहा हूं क्योंकि तुमने फौरन ना नहीं कहा सोच में पड़ गए टीचिंग में सिर्फ बातें बातें और सिर्फ बातें थी
बातें करना बहुत आसान होता है। इस जॉब में बातों की कोई वैल्यू नहीं है। क्राउन रियलिटीज और हैं। आसान काम करते-करते मुश्किल काम में आ गया हूं। वक्त तो लगेगा ना।
हम लगेगा। लेकिन मैं जानती हूं कि तुम कर लोगे। तुम्हारे लिए कोई मुश्किल मुश्किल है ही नहीं। तुम सब कर सकते हो। तुम हमेशा यही कहती रही ना तो मैं वापस ही सब कुछ कर लूंगा।
तो कर लो। क्योंकि मैं हमेशा यहीं रहूंगी। और ऐसे कहती रहूंगी। बस तुम परेशान मत हुआ करो।
अबे तारीख का मतलब आ जाएगा। पूछ रही आपसे कुछ जवाब भी नहीं दिया आपने मुझे। अल्लाहू अकबर। हां, मैं कह रहा था कि हलीमा के लिए दो तीन लोगों ने बात की है मेरे से। एक आध ने तो मुझसे भी बात की इस हवाले से। अच्छे रिश्ते आ रहे हैं उसके।
अच्छा किया हमने पढ़ाया उसे। अनीसा के बारे में गलती हुई थी हमसे। ये भी तो भूल रहे हैं कि अनीसा के वक्त पे हाथी खुद पढ़ रहा था। पुलिस अफसर है बड़ा। बिरादरी वाले, खानदान वाले सब हमसे रिश्ता जोड़ना चाहते हैं। इसीलिए तो सोच में पड़ा हुआ है।