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उत्तराखण्ड विधानसभा के पंचम विधानसभा वर्ष 2026 के तृतीय सत्र की कार्यवाही का सीधा प्रसारण। – Transcript

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Summary

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  • उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल स्वर्गीय भुवन चंद खंडूरी जी का 19 मई 2026 को निधन हो गया।
  • उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट जी का 26 जुलाई 2026 को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
  • उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भूवन चंद खंडूरी जी तथा वरिष्ठ नेता हीरा सिंह बिष्ट जी के निधन पर सदन में गहरा शोक व्यक्त किया गया।
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वंदे मातरम

हरे हरे हरे हरे हरे हरे

श्री राम श्री राम श्याम शिवाय

भारत माता की जय। निधन के निर्देश माननीय नेता सदन सहयोगी गण आज निधन के दो संदेश

यहां पर हैं। पहले अह मेजर जनरल और हमारे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के मंत्री अनेक दायित्वों पर जिन्होंने काम किया श्री खंडू जी का और दूसरा पूर्व हमारे कैबिनेट मंत्री और अनेक जिम्मेदारियों पर उन्होंने अपने जीवन में

बहुत सारे काम किए स्वर्गीय हीरा सिंह मिष्ट जी का। तो पहले मैं खंडोरी जी का श्रद्धांजलि का स्मरण कर रहे और कुशल प्रशासक के रूप में हमेशा समाज की सेवा करी एक बड़ा उदाहरण उन्होंने हम सबके समक्ष रखा और उनका संपूर्ण जिस प्रकार से कार्यशैली होनी चाहिए कैसा कार्य व्यवहार होना चाहिए

अनुशासन का क्या महत्व है मैं आज पूरे सदन की ओर से देश के ऐसे महान सपूत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जी भारत सरकार के मंत्री आदरणीय सेवानिवत्त श्रदेव खंडूरी जी को अपनी भावन श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि भगवान उनको अपने श्री चरणों में स्थान दे।

आदरणीय अध्यक्ष महोदय आपके सम्मुख खड़े होकर श्रदय खंडूरी जी को याद करना अपने आप में बहुत कठिन कार्य है क्योंकि किसी भी बेटी के लिए उसके पिता ही उसके फर्स्ट हीरो होते हैं। उनको उनका पूरा जीवन और जनरल खंडूरी साहब तो उत्तराखंड के ही नहीं

बल्कि पूरे देश के हीरो रहे। उनका संपूर्ण जीवन सादगी भरा था, ईमानदारी पूर्ण था और कर्तव्य निष्ठा की मिसाल उन्होंने अपने जीवन में हम सबके लिए छोड़ी है। उनको जो भी जिम्मेदारियां मिली जब जब मिली कभी उन्होंने उसमें तनिक सा भी कोई संकोच नहीं किया। बड़े मन से विस्तार देते हुए पूरी

ईमानदारी और समर्पण के साथ उन जिम्मेदारियों को निभाया। उच्च पदों पर रहने के बावजूद भी उन्होंने कभी अपने मूल्यों से सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने 1971 के भारत पाक युद्ध में आधारभूत ढांचे के निर्माण में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उनको

अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया जो उनके समर्पण और सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण है शुरुआत की और 1991 में वे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए उन्होंने लगातार पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और संसद में उत्तराखंड की आकांक्षाओं और उस समय

पथक उत्तराखंड संसद में उनके नाम वैचारिक मजबूती देने का काम उस समय हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजबाग मंत्री के रूप में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। स्वर्णिम चतुर्भूत योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने में

उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक बार मुझे ध्यान है कि वो कह रहे थे कि जैसे बहुत सारे लोगों ने अपनेपने बातचीत हुई होगी उसके बारे में उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अटल जी को सुझाव दिया था कि जो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना है इसका नाम आप अटल सड़क योजना रख दीजिए।

तब उन्होंने कहा कि अटल जी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी जिम्मेदारी पर हमेशा नहीं रहता है और जब वो जिम्मेदारी पर नहीं रहता है फिर उसके नाम से होती है तो उतनी तेज गति से चीजें आगे नहीं बढ़ती हैं। इसलिए ये सड़क का नाम अटल सड़क योजना की जगह प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना होना चाहिए था। मैं कहूं पूरे देश के अंदर वैसे तो मुश्किल था और हमारे की निरंतरता जारी

है और उस समय के उनके सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के उनके प्रयासों का लाभ आज सभी करोड़ों लोगों को मिल रहा है। आदरणीय अध्यक्ष महोदय उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद जब वर्ष 2007 और वर्ष 2011 में शासन की एक नई मिसाल पेश की मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की दिशा में भी उनकी पहल इस बात का प्रमाण थी कि वो भ्रष्टाचार के प्रति

सख्त रूप और स्वच्छ प्रशासन में बहुत विश्वास रखते थे। वे मानते थे कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है बल्कि उनका लाभ समाज में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। और जो व्यक्ति लास्ट में खड़ा है उसको भी इन योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, जनता के प्रति गहरी संवेदनशीलता और सेवा का भाव इन

सब का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। प्रदेश की जनता का उन पर बहुत विश्वास था और उस समय खंडूरी है जरूरी का नारा भी बेहद लोकप्रिय हुआ था। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की राजनीति से अनेकों व्यक्तित्व और कृतित ने

उनके जो काम थे उनके जो जीवन का एक उदाहरण था जो काम करने कार्य व्यवहार था राज्य की सेवा जनसेवा के लिए बहुत सारे नौजवानों को भी प्रेरित करने का काम किया ये मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे उनका स्नेह और मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहा और एक बार मैं 2000

11 में उनसे भेंट करने गया था जो विधान भवन है हमारा देहरादून बना तो टाइम के वो इतने पाबंद थे कि मुझे लगता है कि जैसे ही पांच मिनट हुए तो उन्होंने ऐसे घड़ी में देखा और बोले और कुछ तो मैं ये इसलिए कह रहा हूं कि आज जब हम लोग समाज के क्षेत्र में राजनीति के क्षेत्र में काम कर रहे हैं साथ करना

चाहिए। अत्यंत दुख के साथ अह वो दिन आया 19 मई का जब वो विष्णु धाम को प्रस्थान कर गए। उनका जाना प्रदेश और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती है। उनके जाने से वास्तव में एक युग का अंत हो गया। लेकिन यह भी सच है कि महान व्यक्तित्व अपने कार्यों से आते हैं। उनके द्वारा जो

समाज के लिए राष्ट्र के लिए काम किया होता है वो हमेशा स्मरण में रहता है और श्रद्धेय खंडूरी जी का अनुशासित जीवन ईमानदार कार्यशैली और प्रदेश के विकास के प्रति उनका समर्पण सदैव हमें प्रेरणा देता रहेगा। मैं पुनः संपूर्ण सदन की ओर से श्रीदेव खंडू जी के चरणों में अपनी भावहीन श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और इन पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करता

हूं। उनको श्रद्धांजलि देता हूं। बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई। एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया। सारे शहर को वीरान कर गया। ओम शांति। ओम शांति। और स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट जी आदरणीय अध्यक्ष महोदय

वरिष्ठ नेता जिन्होंने अनेक जिम्मेदारियों पर कार्य किया। स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट जी को भी मैं संपूर्ण सदन की ओर से भावन श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सार्वजनिक जीवन में कुछ लोग अपने पदों और दायित्वों के साथसाथ लोगों से जुड़ाव के लिए भी हमेशा याद किए जाते हैं। और स्वर्गीय हीरा

सिंह बिष्ट जी भी ऐसे ही जननेता थे। उन्होंने आम एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और सभी जिम्मेदारियां छोटी चाहे ग्राम लोगों के आंदोलनों को आगे बढ़ाना उनका नेतृत्व करना ऐसी अनेक जिम्मेदारियों का उन्होंने निर्वहन किया। इस पूरी यात्रा में आम आदमी के जो सवाल

हैं उनके कार्य उनके केंद्र में रहे। विशेष रूप से जो हमारे श्रमिक थे उनके प्रति उनका लगाव उनके व्यक्तित्व की एक बड़ी पहचान थी। जब भी कभी भेंट करने के लिए आते थे तो हमेशा इन्हीं सब विषयों पर उनकी बात केंद्रित रहती थी। अपनी रोजी रोटी और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को। उन्होंने हमेशा ताकत देने का काम। आज इस भावना के साथ याद कर रहे होंगे

कि उनकी बात सुनने और उनके लिए खड़ा होने वाला एक जननेता चला गया। आदरणीय अध्यक्ष महोदय लेकिन जनता के प्रति समर्पण और सबके लिए सम्मान का विषय होता है। स्वर्गीय बिष्ट जी की स्पष्टवादिता अनुभव और जन सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का हम सभी आदर करते हैं। अलग राज्य के आंदोलन से लेकर प्रदेश के विकास तक उन्होंने बहुत सारी

भूमिकाएं निभाया। जैसे आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन हम सभी को यह सीख देता है कि जनता से संवाद उसके सुखदख में भागीदारी ही जनसेवा का आधार है। किसी की बात को बहुत धैर्य से सुनना उनकी परेशानी दूर करने का ईमानदार प्रयास करना उस व्यक्ति और उस परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा होता है।

आदरणीय अध्यक्ष महोदय इस कठिन समय में हम सभी की संवेदनाएं उनके परिजनों और उनके शुभचिंतकों को उनके चाहने वालों के साथ हैं। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए भी मैं पहुंचा था। तो बहुत बड़ी संख्या में उनके समर्थक और उनके सभी चाहने वाले लोग वहां पर थे। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों

में स्थान दें और उनके सभी चाहने वाले समर्थकों को उनके कार्यकर्ताओं को सभी को जिनसे भी उनका समाज में संबंध था। जिनको कष्ट हुआ है। भगवान इस कष्ट को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट जी को पुनः मेरी बहुत विनम्र श्रद्धांजलि ओम शांति ओम शांति माननीय नेता प्रतिपक्ष

माननीय अध्यक्ष जी माननीय नेता सदन और सभी मेरे सम्मानित इस सदन के सम्मानित मंत्रीग सदस्य गण स्वर्गीय पवन चंद खंडोरी जी

Frequently asked questions

उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल स्वर्गीय भुवन चंद खंडूरी जी का 19 मई 2026 को निधन हो गया।

उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट जी का 26 जुलाई 2026 को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में कार्य किया।