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Insight: ESTIC 2026 | Science & Technology | India’s Next Leap | 28 October, 2026 – Transcript
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Summary
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- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में भारत 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर रहा जबकि 2015 में वह 81वीं रैंक पर था।
- नई दिल्ली में 27 से 29 अक्टूबर तक इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव यानी ईएसटीआईसी 2026 का आयोजन हो रहा है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया और अगले 3 वर्षों में ठोस टेक्नोलॉजिकल आउटकम्स देने का आह्वान किया।

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Transcript
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[संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]
नमस्कार स्वागत है आप सभी का। आप देख रहे हैं इनसाइट। मैं हूं प्रीति सिंह। किसी भी देश की टेक्नोलॉजिकल स्ट्रेंथ सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वह कितनी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करता है। बल्कि इससे भी होती है कि वह नई टेक्नोलॉजी विकसित करने, उसे बड़े स्तर पर बनाने और दुनिया को सॉलशंस देने में कितना सक्षम है। भारत के सामने भी आज यही सवाल है। स्पेस, एक्सप्लोरेशन से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी तक
हमारे सामने नए अवसर हैं। लेकिन एक और महत्वपूर्ण पहलू है। वैज्ञानिक रिसर्च पर खर्च कितना हो रहा है? यूनिवर्सिटीज और रिसर्च इंस्टीटशंस में होने वाली डिस्कवरीज इंडस्ट्री तक कैसे पहुंच रही हैं? और क्या हमारी साइंटिफिक कैपेबिलिटीज बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, एंप्लॉयमेंट और इकोनमिक ग्रोथ में बदल पा रही हैं इसे। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में भारत 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर रहा। जबकि 2015 में उसकी रैंकिंग
81वीं हुई थी। यानी 81 रैंक पर था वो। यह एक दशक में हुए बदलाव को साफ-साफ दर्शा रहा है। वहीं भारत का ग्रॉस एक्सपेंडिचर ऑन रिसर्च एंड डेवलपमेंट 2023-24 में लगभग 2.45 लाख करोड़ तक पहुंचा। लेकिन जीडीपी के अनुपात में यह 0.84% रहा। यानी निवेश बढ़ने के साथ ही रिसर्च की स्केल और इंपैक्ट पर भी चर्चा जरूरी है। और इसी संदर्भ में नई दिल्ली में 27 से 29 अक्टूबर तक इमर्जिंग साइंस,
टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव यानी ईएसटीआईसी 2026 का आयोजन हो रहा है। इसमें देश विदेश के वैज्ञानिक, रिसर्चरर्स, पॉलिसी मेकर्स, इंडस्ट्री लीडर्स और डीप टेक स्टार्टअप्स शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया और उन्होंने वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और युवा इनोवेटर्स से अगले 3 वर्षों में ठोस मापने योग्य और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले टेक्नोलॉजिकल आउटकम्स देने का आह्वान किया
है। अब बड़ा सवाल यह है कि भारत की रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कितना तैयार है? निवेश से लेकर इंडीजीनिस टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन तक हमारी उपलब्धियां क्या हैं और अगली चुनौतियां हमारे सामने क्या हैं? तमाम ऐसे पहलू हैं जिन पर आज हम चर्चा करेंगे और इन पर विस्तार से चर्चा के लिए मेरे साथ तीन विशेषज्ञ जुड़ रहे हैं जो इस विषय के अलग-अलग महत्वपूर्ण पहलुओं पर रोशनी डालेंगे। सबसे पहले प्रोफेसर टीएन सिंह जी हमारे साथ हैं। आईआईटी बॉम्बे में प्रोफेसर और आईआईटी
पटना के पूर्व निदेशक हैं। आपका बहुत-बहुत स्वागत है टीएन सिंह जी। साथ ही मेरे साथ दूसरे विशेषज्ञ हैं प्रोफेसर डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी। डायरेक्टर जनरल नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी यानी एनआई एलआईटी। आपका बहुत-बहुत स्वागत है डॉ. त्रिपाठी। इसके अलावा तीसरे विशेषज्ञ अमित अग्रहरी हमारे साथ जुड़े हुए हैं। वालंटियर टेक्न टेक्नो इंडस्ट्रियल पॉलिसी आई स्पिरिट फाउंडेशन। बहुत-बहुत स्वागत है आपका अमित जी।
तो शुरुआत मैं प्रोफेसर सिंह आपसे कर रही हूं। पहले समझते हैं कि भारत ने अब तक हासिल क्या किया है। प्रधानमंत्री ने ईएसटीआईसी 2026 में जो हमारी देश की वैज्ञानिक प्रगति है उसका उदाहरण दिया। उन्होंने स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन का जिक्र किया। मंगलयान, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंच और हाल के अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र के माइलस्टोंस का उल्लेख उन्होंने किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में सालाना जो पेटेंट फाइलिंग्स हैं
वो एक दशक पहले 500 से कम थी जो पिछले साल लगभग ₹1.5 लाख तक पहुंच गई। एक वैज्ञानिक के नजरिए से इन उपलब्धियों को आप कैसे देख रहे हैं? क्या ये भारत के रिसर्च इकोसिस्टम में वास्तविक बदलाव का संकेत हमें दिखा रहा है?
जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपको। निश्चित तौर पे भारत ने अच्छी प्रगति की है। इसमें कोई संदेह नहीं है और कोई शंका नहीं है। लेकिन इसके साथ-साथ यह भी कहना चाहूंगा मैं कि भारतवर्ष में शोध के ऊपर खर्चे तो कम होते हैं। जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो देश खर्च कर रहे हैं उनके अनुपात में हमारी खर्च कम है और उस तरह का अनुदान नहीं मिलता है। लेकिन इसके बावजूद
भी भारत अग्रसर है। अपने बहुत सारे है [गला साफ़ करने की आवाज़] टेक्नोलॉजी को लेकर के और पूरे विश्व में इसकी चर्चा है। निश्चित तौर पे अभी जो चुनौतियां हम लोगों के सामने है उनमें निश्चित तौर से एक बेसिक और मूलभूत समस्या है जिसके बारे में आपने बताया कि किस तरह से सभी को पानी की उपलब्धता कराई जाए।
पानी की कमी और क्लाइमेट चेंज जो है जलवायु परिवर्तन यह दूसरा है। तीसरा आजकल सबसे कठिन विषय हम लोगों के लिए है क्रिटिकल मिनरल के ऊपर शोध करना और शोध करके उसको इस तरह से ले आना कि उसके का उपयोग अच्छे से अच्छे हो सके। निश्चित तौर पे इस दिशा में बहुत कुछ काम करने की आवश्यकता है। भारत सरकार ने भी काफी पहल
की है। क्रिटिकल मिडल के ऊपर बहुत सारे हब्स बने हुए हैं। स्पोक्स बने हुए हैं और उसमें रिसर्च करने की आवश्यकता है। लेकिन केवल कुछ जगहों पर रिसर्च करने से काम नहीं चलेगा। इसमें हमें और भी सेक्टर को जोड़ना पड़ेगा। इसमें प्राइवेट सेक्टर हो, सीएसआईआर लैबोरेटरी हो और नेशनल लैबोरेटरी हो और स्टेट यूनिवर्सिटीियों को भी जोड़ना पड़ेगा जिससे कि समग्र रूप से हम इस चीज
को का अध्ययन कर सके क्योंकि आप जानते हैं कि क्रिटिकल मिनरल कहीं पर ऐसा नहीं उपलब्ध है जिस तरह से और भी जो मेजर मिनरल्स उपलब्ध रहते हैं। तो इसके लिए प्रोसेसिंग के लिए अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। एआईएमएल निश्चित तौर से एक वैल्यू एडिशन है। लेकिन निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री ने भी कहा कि एआई तो आपको कम
समय में आपको अच्छा उत्तर दे सकता है। लेकिन उत्तर का प्रमाणिकता को जांच करने का विषय वैज्ञानिकों का है कि वो सही है कि नहीं है। तो निश्चित तौर पे अभी आने वाले सेक्टर एनर्जी के सेक्टर में बहुत सारी संभावनाएं हैं। बिल्कुल। हमने बहुत देर से हाइड्रो पावर के ऊपर जनरेशन स्टार्ट किया है। लेकिन धीरे-धीरे उसमें गति पकड़ रहे हैं। न्यूक्लियर पावर के लिए बहुत अपार संभावनाएं हैं और उसको
लेकर के भी काफी शोध करने की आवश्यकता है। क्योंकि जो भी फ्यूल होता है स्पेंड फ्यूल उसके डिस्पोजल की समस्या बहुत बड़ी होती है। जिसको कि डिस्पोजल करने के लिए कई लेयर पे सिक्योरिटी की व्यवस्था करनी पड़ेगी। हम और यह भी देखना पड़ेगा कि आने वाले 100 वर्षों में वहां का तापमान सामान्य से ज्यादा ना हो। नहीं तो वाटर कंटैमिनेशन की संभावना है। हीट माइग्रेशन की संभावना है
और उसके से ग्राउंड वाटर टेबल कंटमिनेशन होने से बहुत सारी चीजें लोगों को प्रभावित करती हैं। तो ये कई सेक्टर हैं जिनमें हमें चुनौतियां हैं। लेकिन चुनौतियों को का सामना करने के लिए वैज्ञानिक तो सक्षम है लेकिन उन्हें आधारभूत सुविधाओं का मिलना भी बहुत-बहुत आवश्यक है और उसकी सपोर्ट की आवश्यकता है। क्योंकि आप जानते हैं आजकल जो भी देश हैं जिनके पास ज्यादा अच्छे इक्विपमेंट है,
ज्यादा सुविधाएं हैं, एडवांस टेक्नोलॉजी है, वो उस काम को कम समय में जल्दी से अच्छे तरह से एक्यूरेटली कर पाएंगे। विशेष करके जो यदि हमारे पास इक्विपमेंट नहीं है और हम पुरानी पद्धति से उसको काम करेंगे तो उसमें काफी समय लगता है। तो इन सब चीजों को देखना चाहिए और हमें अपने आप से कंपटीशन रखना चाहिए। बसशर्ते इस देश से आगे बढ़े उस देश से आगे बढ़े उससे ज्यादा
है कि हमें अपने आप को कल से बेहतर करना है और कल को जो है फिर परसों से बेहतर करना है। इस दिशा में अग्रसर होने से मुझे लगता है कि हम अच्छा कर पाएंगे। बशर्त कि किसी व्यक्ति को और किसी लकीर को टच करने से बढ़िया है कि अपनी लकीर को ऊंचा किया जाए। बहुत-बहुत धन्यवाद। बिल्कुल। प्रोफेसर त्रिपाठी आपका व्यू क्या है? आपकी समझ क्या कहती है? जब हम आज भारत की वैज्ञानिक क्षमता और निवेश की वास्तविक स्थिति के बारे में बात करते
हैं। क्योंकि जैसे हम कह भी रहे हैं कि भारत का जो ग्रॉस एक्सपेंडिचर ऑन रिसर्च एंड डेवलपमेंट है वो 2023-24 में लगभग मान लीजिए ढ.5 लाख करोड़ के आसपास था। 2.45 लाख करोड़। जो जीडीपी का करीब 0 84% है। तो यह आंकड़ा हमें क्या बता रहा है? देश में रिसर्च पर कितना खर्च हो रहा है?
लेकिन केवल कुल रकम से तस्वीर पूरी नहीं होती है। हम जानते हैं जो मौजूदा निवेश है, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर है और स्किल्ड वर्कफोर्स है उसे देखते हुए भारत आज किस स्थिति में आपकी नजर में खड़ा है और कितना आगे हम आए हैं। कितना आगे हमें और जाना है। देखिए ये जो रिसर्च की फंडिंग है वो एक इंपॉर्टेंट चीज तो है ही। और भारत में रिसर्च में सारा जो फंडिंग है वो सरकार की
तरफ से है। कॉरपोरेट की तरफ से फंडिंग नहीं है रिसर्च में। हम वो एक बहुत बड़ा अंतर है जो दूसरे देशों से अगर हम तुलना करें भारत की भारत का लेकिन इंडस्ट्रियल ग्रोथ हो रहा है और हम ये देख रहे हैं कि आज भारत एक बड़ी ही मजबूत स्थिति में आ गया है और उसका कारण दो है एक तो हमारे पास चैलेंज बहुत है। एक
हमारा पड़ोसी है जो टेक्नोलॉजी में दुनिया में इस समय सबसे एडवांस्ड है। दूसरी चीज क्या है कि हमारे पास सबसे यंग जनरेशन है। तो एक चैलेंज भी है कि हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया में सबसे मजबूत बने और एक अपॉर्चुनिटी भी है कि हमारे पास बड़ा ही युवा है जिसको हम प्रॉपर तरीके से स्किल करके और फंडिंग
सपोर्ट के साथ एक अच्छे रिसर्च और इनोवेशन के इकोसिस्टम को भारत में डेवलप कर सकते हैं। जिससे कि भारत में अपने तरह के प्रोडक्ट्स आ सकते हैं। हम कुछ एरियाज में हम देख रहे हैं जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो अभी हम देख रहे हैं कि चार कंपनीज हैं जो कि अपनी सावरन एआई पे काम कर रही हैं। एलएलम डेवलपमेंट पे काम कर रही है। इसके अलावा बहुत सारे भारत के ऐसे नए इनोवेटर्स आ रहे हैं जो कई
स्मॉल एआई मॉडल्स बना रहे हैं। एआई एजेंट्स बना रहे हैं जो कि आने वाले टाइम में एक ज्यादा बेटर हमको रिटर्न दे सकते हैं। इस जो भी हम इन्वेस्टमेंट उसमें कर रहे हैं। उसी तरीके से आपने देखा होगा कि 6G टेक्नोलॉजी में भारत काफी लीड ले रहा है। काफी पेटेंट्स इन्हने फाइल किए हैं। वी आर थर्ड इन द वर्ल्ड इन फाइलिंग द पेटेंट नाउ। अ क्वांटम टेक्नोलॉजी देख लीजिए। या
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में स्पेशली जो भारत सरकार ने पहल की है पहले आईएसएम 1.0 फिर आईएसएम 2.0 में जहां 1.27 लाख करोड़ का बजट है और पूरे इकोसिस्टम को भारत में डेवलप किया जा रहा है। अगर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में देख लीजिए जिसमें कि स्किल भी है, आरएडी भी है, जहां मशीनंस की बात भी हो रही है, मटेरियल्स की बात भी हो रही है, कंप्लीट सप्लाई चेन की बात हो रही है। तो अभी कुछ अलग तरीके का इकोसिस्टम हो
रहा है। ए एनआरएफ है तो शायद भारत सरकार एक अच्छी पहल कर रही है कि इस पूरे कंप्लीट इकोसिस्टम को रिसर्च के लिए इनोवेशन के लिए डेवलप कर रही है। उसी तरीके से बायोटेक्नोलॉजी में या बायो इनफेटिक्स में या लाइफ साइंसेस में काम हो रहे हैं। तो ओवरऑल इकोसिस्टम तो देश में है। युवा भी हैं और स्किलिंग के इकोसिस्टम्स भी बहुत अच्छे बन रहे हैं। कॉरपोरेट का इन्वॉल्वमेंट भी बढ़ा है देश में रिसर्च में। तो मुझे लगता है कि एक
बेहतर इकोसिस्टम है जिसको अगर सही तरीके से हम यूज करें तो आने वाले टाइम में हम लोग बहुत सारे नए इनोवेशंस को भारत में देख सकते हैं और एक अच्छी बात ये है कि राज्य सरकार और केंद्र की सरकार ये सरकारें भी बहुत ज्यादा प्रोत्साहित कर रहे हैं स्टार्टअप्स को हम देखिए जो स्टार्टअप इकोसिस्टम हमारे देश में बना है वो बहुत अच्छा है थोड़ा सा और डीप टेक्नोलॉजी के जो स्टार्टअप्स हैं उनको प्रमोट करने की जरूरत है उनको सपोर्ट करने
की जरूरत है तो मुझे लगता है कि हर क्षेत्र में जो नई टेक्नोलॉजी है उसमें भारत इनोवेशन करेगा और केवल टेक्नोलॉजी की बात नहीं है। बेसिक साइंस में भी रिसर्च का बड़ा ही इंपॉर्टेंट है। जो ये तो ठीक है कि जो हम दुनिया में टेक्नोलॉजीस हैं उनको हम एट पार रहे हैं। जैसा प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हम अभी तक फॉलो करते रहे हैं। लेकिन हमें शायद कुछ ऐसे बेसिक रिसर्च भी लेके आने पे सोचना चाहिए
जो पहली बार दुनिया में भारत लेके आए। तो उस पर भी अब हमको ऐसे माइंडसेट को डेवलप करने की जरूरत है। तो पैसे की तो आवश्यकता है सिस्टम की जरूरत है बट एक रिसर्च और इनोवेशन की माइंडसेट को जरूरत करने की डेवलप करने की जरूरत है। और इस तरह के लोगों को प्रमोट करने की जरूरत है। तो हमको लगता है आने वाले समय में शायद भारत से कोई बहुत ही बड़ा बेसिक रिसर्च भी आगे आए या कोई ऐसा प्रोडक्ट भी आगे आ सकता है