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Summary
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- ललिता को नदी किनारे एक अजीब आंख मिलती है जो उसके अंदर समा जाती है और उसे किसी भी चीज की असली कीमत बताने की खास शक्ति देती है।
- अपनी शक्ति की मदद से ललिता अपनी मां की गंभीर बीमारी का पता लगाती है और एक पुराने बर्तन की असलियत साबित करके कुणाल और चंपा से माफी मंगवाती है।
- मां के इलाज के लिए पैसे जुटाने के बाद ललिता शहर में कबाड़ की दुकान खोलती है जहां वह पुरानी और बेकार चीजों से अच्छी कमाई करती है।

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Transcript
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लड़की नदी किनारे कपड़े धो रही होती है। तभी उसे पानी में एक अजीब सी आंख दिखाई देती है। वह उसे देखकर घबरा जाती है और दूर रहने के लिए कहती है। लेकिन वह आंख उसका पीछा नहीं छोड़ती। ललिता उससे दूर जाने को कहती है। तभी आंख बोलती है कि डरो मत। मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी। यह सुनकर ललिता हैरान रह जाती है और उस आंख को अपने साथ रख लेती है। तभी वहां गांव की चंपा आ जाती है। ललिता जल्दी से उस आंख को अपने पीछे छिपा लेती है। चंपा अपनी घड़ी दिखाकर सबके सामने रब जमाती है और कहती है कि इसकी कीमत ही000 है। वह ललिता को गरीब समझकर उसका मजाक भी उड़ाती है। तभी वह आंख ललिता के अंदर समा जाती है और उसे एक खास शक्ति मिल जाती है जिसे वह किसी भी चीज असली कीमत बता सकती
है। ललिता अपने खास शक्ति की मदद से एक घड़ी की जांच करती है और बताती है कि वह नकली है। चंपा उसकी बात पर विश्वास नहीं करती। मगर जब घड़ी का रंग उतरने लगता है तो उसकी असलियत सबके सामने आ जाती है। अपनी बेइज्जती से नाराज चंपा वहां से चली जाती है। इसके बाद ललिता घर लौटती है और अपनी शक्ति की मदद से मां की हालत जांचती है। सिस्टम बताता है कि उसकी मां के दिल की नसों में गंभीर रुकावट है। इसलिए वह तुरंत डॉक्टर के पास ले जाती है। डॉक्टर उन्हें बताता है कि जल्द इन्हें इलाज की जरूरत है। यह जानकर ललिता परेशान हो जाती है और तुरंत घर पहुंचती घर में कोई कीमती चीज ढूंढने लगती है। लेकिन उसे कुछ नहीं मिलता और वह बैठकर रोने लगती है क्योंकि उसे मां के इलाज के लिए पैसे जुटाने थे।
तभी उसका कुत्ता एक पुराना बर्तन लेकर वहां आ जाता है। ललिता उसे वहां से हटाने की कोशिश करती है। लेकिन कुत्ता बार-बार बर्तन के पास जाने लगता है। आखिरकार ललिता उस बर्तन को उठाकर अपने सिस्टम से उसकी जांच करती है। सिस्टम बताता है कि यह सोम राजवंश के समय का बेहद पुराना और असली रुमाऊ बर्तन है। जिसकी कीमत बहुत ज्यादा है। ललिता बर्तन लेकर शहर के अमीर युवक कुणाल के पास पहुंचती है। कुणाल उस पुराने बर्तन को देखकर उसका मजाक उड़ाने लगता है। उसे लगता है कि ललिता एक बेकार बर्तन को कीमती खजाना समझ रही है। लेकिन ललिता अपनी बात पर कायम रहती है और दोनों के बीच शर्त लग जाती है। अगर बर्तन असली निकला तो कुणाल को सबके सामने ललिता और उसकी मां से माफी मांगनी होगी। वहीं अगर बर्तन नकली
हुआ तो ललिता को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ेगी। वहां मौजूद चंपा भी इस शर्त में कुणाल का साथ देती है और बोलती है कि अगर सच में इसमें से कोई कीमती चीज निकला तो वह भी माफी मांगेगी। ललिता बर्तन को लेकर एक हथौड़े से परत हटाती है तो अंदर से असली प्राचीन रूमाऊ बर्तन निकलता है जिसे देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह जाते हैं। ललिता उस बर्तन का जांच करवाती है जिससे साबित हो जाता है कि यह एक प्राचीन बर्तन है। चंपा और कुणाल को अपनी गलती माननी पड़ती है और वह ललिता से माफी मांगती है। बर्तन की कीमत के बदले कुणाल ललिता को ₹5000 देने की पेशकश करता है। ललिता पैसे लेकर तुरंत अस्पताल पहुंचती है। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि उसकी मां के ऑपरेशन के लिए ₹00 की जरूरत है। अब ललिता बाकी पैसों का इंतजाम करने में जुट
जाती है। मां के इलाज के लिए पैसे जुटाने के बाद ललिता शहर में कबाड़ की दुकान खोलने का फैसला करती है। वह ऐसी दुकान शुरू करती है जहां लोग अपना पुराना और बेकार सामान बेच सकें। ललिता जानती है कि जिन चीजों को लोग बेकार समझ कर फेंक देते हैं उनमें भी कीमती खजाना छिपा हो सकता है। कुछ ही समय में ललिता अपनी दुकान शुरू कर देती है। गांव के लोग उसे देखकर मजाक उड़ाते हैं। चंपा भी वहां पहुंचकर उसका अपमान करती है और उसे बेकार सामान बेचने वाली लड़की कहती है। लेकिन ललिता उसकी बातों पर ध्यान नहीं देती और अपना काम करती रहती है। इसी दौरान ललिता को कुछ पुराने सिक्के मिलते हैं। वह अपने सिस्टम से उनकी जांच करती है तो पता चलता है कि वे दुर्लभ और कीमती सिक्के हैं। ललिता उन्हें एक पुराने सामान के व्यापारी को
दिखाती है। व्यापारी उनकी असलियत पहचान कर उन्हें खरीदने के लिए ₹00 देने को तैयार हो जाता है। यह देखकर चंपा हैरान रह जाती है। जिस ललिता का वह मजाक उड़ाती वही अब पुरानी चीजों से अच्छी कमाई कर रही थी। ललिता को भी विश्वास हो जाता है कि उसकी छोटी सी दुकान एक दिन बड़ा कारोबार बन सकती है। अब इसके आगे क्या हुआ?