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Krishna Vandan · Transcript · · Updated

बुरे समय में गीता सुनो | Shree Krishna Motivational Speech | Geeta saar |#krishnamotivation – Transcript

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Summary

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  • श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी दरिद्रता धन की कमी नहीं बल्कि संतोष की कमी होती है।
  • श्री कृष्ण के अनुसार मनुष्य का भविष्य उसकी परिस्थितियां नहीं बल्कि उसके निर्णय तय करते हैं।
  • श्री कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति क्षमा करना सीख जाता है वह सबसे पहले खुद को आजाद कर देता है।
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Transcript

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श्री कृष्ण कहते हैं मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी दरिद्रता धन की [संगीत] कमी नहीं बल्कि संतोष की कमी होती है। जिसके पास सब कुछ होते हुए भी मन अशांत है वह वास्तव में निर्धन है। और जिसके पास सीमित साधन होते हुए भी मन शांत है वही सबसे समृद्ध है। इसीलिए अपने जीवन का मूल्य वस्तुओं से नहीं अपने संस्कारों और अपने

चरित्र से तय करो। संसार की हर चमक तुम्हारे लिए आवश्यक नहीं होती। कई बार जो चीज दूर से आकर्षक दिखाई देती है, वही पास आने पर चिंता का कारण बन जाती है। इसलिए किसी भी निर्णय को केवल लालच या दिखावे के आधार पर मत लो। पहले यह सोचो कि क्या वह तुम्हारे [संगीत] जीवन में शांति बढ़ाएगा या अशांति।

यदि उत्तर अशांति है तो उससे दूर रहना ही बुद्धिमानी है। याद रखो मनुष्य को गिराने वाले बड़े पाप अचानक नहीं आते। वे छोटी-छोटी गलत आदतों के रूप में प्रवेश करते हैं। एक छोटा सा झूठ, थोड़ा सा अहंकार, थोड़ी सी ईर्ष्या और थोड़ी सी लापरवाही धीरे-धीरे [संगीत] पूरे व्यक्तित्व को बदल देती है। इसलिए अपने मन

के द्वार पर सदैव विवेक [संगीत] का पहरा रखो। जो विचार तुम्हें सत्य से दूर ले जाए उसे तुरंत छोड़ दो। जो आदत तुम्हारे समय को व्यर्थ करती हो उसे आज ही समाप्त करने का संकल्प लो। एक नगर में एक वृद्ध दीपक बनाने वाला कारीगर रहता था। उसकी बनाई हुई मिट्टी की दीपक दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी। एक दिन उसका शिष्य बोला। गुरु जी इतने

सुंदर दीपक बनाते हैं। फिर भी लोग आपके नाम से अधिक दीपकों की रोशनी की प्रशंसा करते हैं। क्या आपको बुरा नहीं लगता? वृद्ध मुस्कुराया और बोला यदि दीपक अपना नाम चमकाने लगे और प्रकाश देना भूल जाए तो उसका होना ही व्यर्थ है। मेरा उद्देश्य प्रसिद्ध होना नहीं अंधकार मिटाना है। श्री कृष्ण कहते हैं यही बात मनुष्य पर भी लागू होती है। यदि तुम्हारे हर अच्छे

कार्य के पीछे केवल प्रशंसा पाने की इच्छा है तो तुम्हारा पुण्य अधूरा रह जाएगा। लेकिन यदि तुम बिना किसी स्वार्थ के किसी का जीवन थोड़ा भी सरल बना दो तो वह कर्म सीधे ईश्वर तक पहुंचता है। इसलिए सेवा करो लेकिन बदले में सम्मान की अपेक्षा मत रखो। प्रेम दो लेकिन प्रतिफल की शर्त मत रखो। अपना कर्तव्य निभाओ लेकिन हर समय परिणाम

की चिंता मत करो। जीवन में ऐसे अवसर आएंगे जब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारी मेहनत का फल नहीं मिल रहा। पर उसी समय धैर्य तुम्हारी सबसे बड़ी परीक्षा ले रहा होता है। जो व्यक्ति उस परीक्षा में सफल हो जाता है उसके लिए भविष्य नए द्वार खोल देता है। इसलिए अपने मैन को शिकायतों से मुक्त रखो और उसे विश्वास से भर दो। जो बीत [संगीत]

गया उसे सीख लो। जो आज है उसमें श्रेष्ठ कर्म करो। और जो आने वाला है उसे भगवान पर छोड़ दो। यही जीवन जीने की सबसे सरल और सबसे गहरी कला है। जब मनुष्य इस रहस्य को समझ लेता है तब परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो उसके चेहरे की शांति कोई छीन नहीं सकता क्योंकि उसका भरोसा संसार पर नहीं ईश्वर पर होता

है। श्री कृष्ण कहते हैं मनुष्य का भविष्य उसकी परिस्थितियां नहीं बल्कि उसके निर्णय तय करते हैं। बहुत से लोग अपनी असफलताओं का दोष, समय, भाग्य या दूसरों पर डालते रहते हैं। लेकिन जो व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार कर लेता है, उसके जीवन में परिवर्तन उसी दिन से शुरू हो जाता है। याद रखो ईश्वर ने हर मनुष्य

को सोचने की शक्ति, कर्म करने की क्षमता और सही गलत का विवेक दिया है। यदि इन तीनों [संगीत] का सही उपयोग कर लिया जाए तो कोई भी बाधा अधिक समय तक रास्ता नहीं रोक सकती। अपने जीवन में एक नियम बना लो कि किसी भी निर्णय को केवल भावनाओं के आधार पर मत लेना। क्रोध में लिया गया निर्णय पछतावा देता है। लालच में लिया गया निर्णय नुकसान देता है और डर में लिया गया

निर्णय अवसर छीन लेता है। इसलिए जब भी मन अशांत हो पहले स्वयं को शांत करो फिर निर्णय लो। शांत मन कभी गलत दिशा नहीं दिखाता। जो व्यक्ति हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है, वह अक्सर अपनी ही बनाई हुई परेशानियों में उलझ [संगीत] जाता है। लेकिन जो सुनना समझना और सही समय का इंतजार करना जानता है, वही जीवन में सम्मान और सफलता दोनों प्राप्त करता है।

अगर कृष्णा वंदन के विचार आपके मन को छू रहे हो तो चैनल को सब्सक्राइब करके हमारे साथ जुड़े रहें। तो चलिए अब आगे बढ़ते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो शिकायतों की जगह जिम्मेदारी लेना शुरू करो। जो व्यक्ति हर बात का दोष किस्मत, समय या लोगों पर डालता रहता है वो कभी अपने जीवन को नहीं बदल पाता। बदलाव उसी दिन शुरू होता है जिस दिन

इंसान कहता है कि अब जो करना है मुझे ही करना है। उस दिन से उसकी दिशा बदल जाती है। जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे जब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारे साथ न्याय नहीं हुआ। लेकिन उसी समय धैर्य की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया फैसला अक्सर लंबे समय का पछतावा बन जाता है। शांत मन से लिया गया निर्णय ही

सही रास्ता दिखाता है। जैसे गंदे पानी में अपना चेहरा साफ दिखाई नहीं देता वैसे ही बेचैन मन सही फैसला नहीं कर सकता। इसलिए जब मन अशांत हो तब निर्णय नहीं धैर्य चुनो। श्री कृष्ण कहते हैं दूसरों की खुशी देखकर दुखी मत हो बल्कि यह सोचो कि अगर भगवान ने उन्हें दिया है तो वह तुम्हें भी

सही समय पर देगा। ईर्ष्या से किसी का भला नहीं होता। इससे सिर्फ मन अशांत होता है और मेहनत करने का उत्साह खत्म हो जाता है। अपनी दौड़ खुद दौड़ो क्योंकि भगवान ने हर किसी की मंजिल अलग बनाई है। किसी की रफ्तार तेज है किसी की धीमी। लेकिन जो चलता रहता है वही आखिर में पहुंचता है। रास्ते में मिलने वाली

रुकावटें यह नहीं बताती कि रास्ता गलत है बल्कि यह बताती हैं कि मंजिल की कीमत है। इसलिए हर कठिनाई को रुकने का कारण नहीं मजबूत बनने का अवसर समझो। जीवन में कुछ लोग सिर्फ तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए आते हैं और कुछ लोग तुम्हें सही रास्ता [संगीत] दिखाने के लिए। दोनों का धन्यवाद करना सीखो। जिसने साथ दिया उसने तुम्हें सहारा दिया और जिसने साथ छोड़ा उसने

तुम्हें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया। इसलिए किसी से नफरत लेकर मत चलो। मन में जितना कम बोझ होगा सफर उतना ही आसान होगा। अंत में हमेशा यही याद रखना कि भगवान तुम्हें वहां नहीं पहुंचाते जहां रास्ता आसान हो। बल्कि वहां पहुंचाते हैं जहां पहुंचकर तुम्हारा जीवन दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन जाए। इसलिए चलते रहो, सीखते रहो। अपने स्वभाव को अच्छा रिफ्रेश देते

रहो और हर दिन पहले से बेहतर इंसान बनने की कोशिश करते रहो। यही जीवन की सबसे बड़ी कमाई है और यही श्री कृष्ण के बताए मार्ग पर चलने की पहचान है। मित्रों श्री कृष्ण कहते हैं जीवन में हर इंसान दो तरह का बोझ उठाता है। एक वो जो उसके कंधों पर होता है और दूसरा वो जो उसके मन में होता है। कंधों का बोझ कुछ देर बाद उतर जाता है।

लेकिन मन का बोझ अगर बढ़ जाए तो हंसता हुआ इंसान भी भीतर से टूटने लगता है। इसलिए सबसे पहले अपने मन को हल्का करना सीखो। जो बातें बीत चुकी हैं, उन्हें बार-बार याद करके अपने आज को मत बिगाड़ो। बीता हुआ समय लौट कर नहीं आता लेकिन उससे मिली सीख हमेशा हमारे साथ रहती है। समझदार वही है जो घटना को नहीं उससे मिली सीख [संगीत] को

अपने साथ रखता है। कई लोग छोटी सी बात को इतना बड़ा बना लेते हैं कि उनका पूरा दिन खराब हो जाता है। कोई कुछ कह दे तो घंटों उसी के बारे में सोचते रहते हैं। कोई साथ ना दे तो अपने आप को अकेला समझ लेते हैं। लेकिन जरा सोचिए क्या हर वह इंसान जो आपके साथ नहीं है वह आपका दुश्मन है? नहीं। हर व्यक्ति की अपनी परिस्थितियां होती हैं।

इसलिए हर बात को अपने खिलाफ मत समझो। कई बार सामने वाला भी अपनी लड़ाई लड़ रहा होता है। श्री कृष्ण कहते हैं दूसरों के व्यवहार से पहले उनकी परिस्थिति को समझने की कोशिश करो। इससे मन में शिकायत कम और समझदारी ज्यादा आएगी। याद रखो जो इंसान हर किसी को गलत मानता है वह एक दिन खुद भी सबसे दूर हो जजस्टा है। रिश्ते जीतने

[संगीत] से नहीं निभाने से चलते हैं। घर बड़ा होने से परिवार बड़ा नहीं बनता बल्कि एक दूसरे के लिए दिल बड़ा होने से परिवार मजबूत बनता है। जिस घर [संगीत] में लोग एक दूसरे की बात सुनते हैं, वहां झगड़े ज्यादा दिन नहीं टिकते। लेकिन जहां हर कोई सिर्फ अपनी बात मनवाना चाहता है, वहां धीरे-धीरे अपनापन खत्म होने लगता है। इसलिए अपनी बात कहने से पहले सामने वाले

की बात सुनने की आदत डालो। सुनना भी एक [संगीत] कला है और जो इसे सीख जाता है उसके रिश्ते लंबे समय तक चलते [संगीत] हैं। अगर कृष्णा वंदन के विचार आपके मन को छू रहे हो तो चैनल को सब्सक्राइब करके हमारे साथ जुड़े रह। तो चलिए अब आगे बढ़ते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं अगर तुम्हारा भरोसा भगवान पर है तो फिर डर कैसा? जो तुम्हें यहां तक लेकर आया है वो आगे का रास्ता भी दिखाएगा।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाओ। भगवान रास्ता दिखाते हैं। चलना हमें ही पड़ता है। नाव किनारे पर खड़ी रहे तो सुरक्षित जरूर रहती है। लेकिन नाव किनारे पर खड़े रहने के लिए नहीं बनाई जाती। उसे नदी में उतरना ही पड़ता है। उसी तरह इंसान भी सिर्फ सुरक्षित रहने के लिए पैदा नहीं हुआ बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य पूरा करने के लिए पैदा हुआ है। कई लोग अपनी छोटी सी असफलता को अपनी पहचान

बना लेते हैं। अगर एक व्यापार में नुकसान हो गया तो खुद को असफल मान लिया। अगर एक परीक्षा खराब हो गई तो खुद को कमजोर मान लिया। अगर किसी ने साथ छोड़ दिया तो खुद को अकेला मान लिया। लेकिन सच यह है कि एक घटना कभी भी पूरे इंसान [संगीत] की पहचान नहीं होती। सूरज को भी बादल कुछ समय के लिए छिपा देते हैं। लेकिन क्या सूरज अपनी रोशनी खो देता है? नहीं। [संगीत] उसी तरह तुम्हारे जीवन में भी चाहे कितनी

ही परेशानियां आ जाए तुम्हारे अंदर की शक्ति खत्म नहीं होती। बस उसे पहचानने की जरूरत होती है। श्री कृष्ण कहते हैं दूसरों से उम्मीद कम और खुद पर विश्वास ज्यादा रखो। क्योंकि उम्मीद टूटती है तो दुख होता है लेकिन विश्वास मजबूत होता है तो रास्ते खुद बनने लगते हैं। दुनिया में हर व्यक्ति अपने हिसाब से जी रहा है। इसलिए हर किसी से यह उम्मीद मत रखो कि वह

तुम्हारी भावनाओं को समझेगा। अगर कोई तुम्हारी अच्छाई की [संगीत] कदर नहीं करता तो अपनी अच्छाई बदलने की जरूरत नहीं है। फूल अपनी खुशबू इसलिए नहीं छोड़ता कि किसी ने उसकी तारीफ नहीं की। वह अपना काम करता रहता है। तुम्हें भी अपना कर्म करते रहना चाहिए। लोग क्या कहेंगे, लोग क्या [संगीत] सोचेंगे? इन बातों में जो इंसान उलझ गया, वह कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया। याद रखो, जब तुम सफल नहीं होते, तब लोग

तुम्हारा मजाक उड़ाते हैं और जब सफल हो जाते हो, तब वही लोग तुम्हारी तारीफ करते हैं। इसलिए लोगों की बातों से ज्यादा अपने लक्ष्य पर ध्यान दो। श्री कृष्ण कहते हैं, जीवन में सबसे अमीर वह नहीं होता जिसके पास सबसे ज्यादा धन हो। बल्कि सबसे अमीर वह होता है जिसके मन में संतोष हो। जिस इंसान की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती उसकी खुशियां भी कभी पूरी नहीं होती। आज उसे एक

[संगीत] चीज चाहिए, कल दूसरी चाहिए, फिर तीसरी चाहिए। ऐसे इंसान का मन कभी शांत नहीं होता। लेकिन जो भगवान का धन्यवाद करना सीख जाता है, वह छोटी-छोटी खुशियों में भी आनंद ढूंढ लेता है। सुबह की हवा, अपनों की मुस्कान, माता-पिता का आशीर्वाद, अपने हाथों की मेहनत और ईश्वर का नाम। जिसे इनकी कीमत समझ आ गई उसे जीवन का असली सुख

मिल गया। इसलिए मित्रों, कभी भी अपने जीवन को अभाव से मत देखो। उसे भगवान के आशीर्वाद की नजर से देखो। जो तुम्हारे पास है, पहले उसके लिए धन्यवाद दो। फिर जो नहीं है उसके लिए मेहनत करो। शिकायत करने से किस्मत नहीं बदलती लेकिन कर्म करने से जरूर बदलती है। याद रखिए भगवान देर जरूर करते हैं लेकिन अंधेर [संगीत] कभी नहीं करते। जो व्यक्ति सच्चे मन से मेहनत करता

Frequently asked questions

श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी दरिद्रता धन की कमी नहीं बल्कि संतोष की कमी होती है।

श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य का भविष्य उसकी परिस्थितियां नहीं बल्कि उसके निर्णय तय करते हैं।

श्री कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति क्षमा करना सीख जाता है वह सबसे पहले खुद को आजाद कर देता है।