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Discrete Mathematics 06 : Propositional Logic | CS & IT | GATE 2026 Crash Course – Transcript

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Summary

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  • लॉजिक में हम उन्हीं स्टेटमेंट्स के बारे में बात करते हैं जिनके दो पहलू होते हैं, या तो वो ट्रू होगा और या तो वो फॉल्स होगा।
  • स्टेटमेंट्स दो तरीके के होते हैं, जिसमें एक सिंपल स्टेटमेंट होता है और दूसरा कंपाउंड स्टेटमेंट होता है।
  • गणितीय लॉजिक में हम स्टेटमेंट की वैलिडिटी चेक करते हैं कि वह लॉजिकली वैलिड या साउन्ड है या नहीं।
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Transcript

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गुड इवनिंग टू एवरीवन। गुड इवनिंग टू ऑल ऑफ़ यू। प्लीज लेट मी नो दैट द वॉइस इज़ क्लियर। वीडियो इज़ क्लियर। एक बार बता देना वॉइस सही है, वीडियो सही है देन वी कैन स्टार्ट विद आवर सेशन। गुड इवनिंग टू ऑल ऑफ यू। गुड इवनिंग एवरीवन। गुड इवनिंग टू ऑल ऑफ यू। प्लीज लेट मी नो दैट द वॉइस इज़ क्लियर। वीडियो इज़ क्लियर।

एक बार बता देना। ठीक है? हम ठीक है। सब कुछ सही है। ठीक है। स्टार्ट कर लें एवरीवन।

ठीक है। चलो। यस। गुड इवनिंग टू ऑल ऑफ यू। वेरी गुड इवनिंग टू एवरीवन। आज हम लोग जो है वो लॉजिक स्टार्ट करने वाले हैं। लॉजिक क्या होता है? बेसिकली अ तो हम लोग ना इसमें बहुत ज्यादा टाइम स्पेंड नहीं करेंगे। मतलब अ बाकी की छोटी-छोटी चीजें पढ़ने के लिए कोई मतलब नहीं है। जैसे फॉर एग्जांपल के लिए कि एंड क्या होता है और क्या होता है। तो इंस्टेड

ऑफ यू नो नॉट गिविंग टाइम ऑन दैट वी विल डायरेक्टली स्टार्ट विद द क्वेश्चंस। चलेगा आप लोगों को। छोटी-छोटी चीजें हैं वो मैं आप लोगों को बता दूंगा। ठीक है? बट मतलब अगर मेनली अगर हमें क्रैश कोर्स के हिसाब से पढ़ना है तो क्रैश कोर्स के हिसाब से हमारा मेन टॉपिक जो होगा विल ट्राई टू स्टार्ट मोस्टली द क्वेश्चंस। ठीक है? मतलब हम ऑपरेटर के बारे में बात

नहीं करेंगे। वी विल नॉट मच टॉक अबाउट द ऑपरेटर बट वी विल डायरेक्टली। ठीक है? अ यू कैन से दैट लिटिल बिट। ठीक है? ऑलमोस्ट सेम है। तो चलते हैं प्रपोजीिशनल लॉजिक के बारे में बात करते हैं। बट प्रपोज़िशनल लॉजिक स्टार्ट करने के पहले जैसा कि मैंने आप लोगों को यहां पर हम लोग डिस्कशन करेंगे। और वो डिस्कशन में यह

होगा मेनली कि जो लॉजिक है हमारे पास में ठीक है अ जो भी हम लॉजिकल स्टेटमेंट होते हैं पहले एक थोड़ा सा एक बेसिक आईडिया दे देते हैं मतलब 10 से 15 मिनट का उसके बाद हम लोग डायरेक्टली शॉर्ट टर्म वाला अपना क्रैश कोर्स जो है वो स्टार्ट कर लेते हैं। क्रैश को स्टार्ट करने के लिए मैं आपको बोलूंगा कि लॉजिक में हम वही

स्टेटमेंट्स पढ़ते हैं जिन स्टेटमेंट्स के दो मतलब होते हैं। जिन स्टेटमेंट की दो वैल्यू्यूज होती हैं। तो फॉर एग्जांपल के लिए अ हम ऐसा जरूरी नहीं है कि लॉजिक में हम सारे स्टेटमेंट्स पढ़ते हैं। लॉजिक में हम उन्हीं स्टेटमेंट्स के बारे में बात करते हैं जिनकी दो मतलब होते हैं जिनकी दो वैल्यूज़ होती हैं। जैसे फॉर एग्जांपल के लिए कि एग विल हैश ऑ नॉट हैश। द मिसाइल विल फ्लाई ऑ नॉट। ठीक है? आइदर ज़ीरो और वन मतलब जिनके पास भी दो पॉसिबिलिटीज होती

है, हम उन्हीं पॉसिबिलिटीज़ के बारे में डिस्कशन करेंगे। तो लॉजिक में हम हर एक स्टेटमेंट्स के बारे में बात नहीं करते हैं। लॉजिक में हम उन स्टेटमेंट्स के बारे में बात करते हैं जिनके दो पहलू होते हैं। या तो वो ट्रू होगा और या तो वो फॉल्स होगा। ठीक है? या तो वो ट्रू होगा या तो वो फॉल्स होगा। या तो अ द वैल्यू विल बिकम वन और द वैल्यू विल बिकम ज़ीरो। तो हम उन्हीं स्टेटमेंट्स के बारे में बात करते हैं। स्टेटमेंट्स जो होते हैं वो दो तरीके

के स्टेटमेंट्स होते हैं हमारे पास में। एक तरीके का स्टेटमेंट्स होता है जो सिंपल स्टेटमेंट्स बोला जाता है और दूसरे तरीके का जो स्टेटमेंट्स होता है जिनको हम लोग कंपाउंड स्टेटमेंट्स बोलते हैं। तो हम लॉजिक में दो तरीके के स्टेटमेंट्स पे डील करते हैं। एक तरीके के स्टेटमेंट्स को हम लोग क्या कहते हैं? सिंपल स्टेटमेंट कहते हैं। और दूसरे तरीके के स्टेटमेंट्स को हम लोग क्या कहते हैं? हम लोग लॉजिकल स्टेटमेंट्स कहते हैं। आई मीन सिंपल स्टेटमेंट कहते हैं। और एक कंपाउंड स्टेटमेंट होता है।

तो सिंपल स्टेटमेंट ऐसे स्टेटमेंट्स होते हैं जिनको हम ब्रेक नहीं कर सकते। फॉर एग्जांपल के लिए अब अगर मैं बोलूं कि 5 इज > 3 तो ये क्या हो गया? ये एक सिंपल प्रपोजिशनल स्टेटमेंट हो गया। ठीक है? 5 इज ग्रेटर दैन 3। अब कंपाउंड स्टेटमेंट क्या होता है? कंपाउंड स्टेटमेंट मतलब सिंपल स्टेटमेंट ऐसे टाइप ऑफ स्टेटमेंट्स होते हैं जिनको हम ब्रेक नहीं कर सकते। लेकिन कंपाउंड वाले स्टेटमेंट्स ऐसे स्टेटमेंट्स होते हैं जिनको हम लोग क्या कर सकते हैं? ब्रेक कर सकते हैं। ठीक है?

तो सिंपल वाले को हम ब्रेक नहीं कर सकते। फॉर एग्जांपल माय नेम इज सतीश यादव। मैं फिर से बता दे रहा हूं। जरा सा फोकस करना। आप लोगों को सब कुछ समझ में आ जाएगा। जहां कहीं पर नहीं आएगा। ठीक है? ठीक है? जहां कहीं पर भी नहीं समझ में आएगा देन वी विल डिस्कस अबाउट इट। देखो जैसा कि मैंने आपको बताया कि हमारे पास में दो टाइप के स्टेटमेंट्स होते हैं। मतलब ये जो स्टेटमेंट्स होते हैं वो हम कौन से स्टेटमेंट्स डील करते हैं? हम

लॉजिक में बहुत ही अलग-अलग तरीके के स्टेटमेंट्स मतलब पूरे मैथमेटिकल लॉजिक में आप जो भी तरीके का स्टेटमेंट यूज़ करते हो हम वही स्टेटमेंट यूज़ कर सकते हैं जिनके दो आउटकम होते हैं। या तो वन या तो ज़ीरो या तो ट्रू या तो फॉल्स। चाहे आप कुछ भी लॉजिक पढ़ लो। बेसिकली लॉजिक हम यूज़ क्यों करते हैं? पहले मैं ये भी बता दूं। हम लोग लॉजिक इसलिए यूज करते हैं क्योंकि अगर हमें फॉर एग्जांपल के लिए हम लॉजिक विल गिव्स द टू प्रूव द वैलिडिटी ऑफ अ

स्टेटमेंट। मतलब जैसे अगर आप एमएस करने गए, पीएचडी करने गए तो आप रिसर्च पेपर लिखते हो। तो उस रिसर्च पेपर लिखने के टाइम पे आप क्या करते हो? आप एक पूरा थीसिस लिखते हो। तो उसमें ऑब्वियसली बात है कि स्टेटमेंट्स होंगे। अब अगर वो स्टेटमेंट्स होंगे तो वो स्टेटमेंट की वैलिडिटी चेक करने के लिए कुछ ना कुछ होना चाहिए। तो वो स्टेटमेंट्स की वैलिडिटी चेक करने के लिए हमारे पास में यह लॉजिक होता है। तो यह लॉजिक ही हमें यह बताता है कि ये स्टेटमेंट्स आपका वैलिड है या नहीं है।

या आप दूसरे तरीके से ऐसा समझ सकते हो कि अगर हमारे पास में थ्योरम है तो वो थ्योरम जो है क्या वो सही है या गलत है या फिर मतलब लॉजिकली वैलिड है या नहीं है? लॉजिकली साउंड है या नहीं है? ये कौन बताएगा? ये भी हमें मैथमेटिकल लॉजिक बताएगा। तो मैथमेटिकल लॉजिक इट गिव्स अस पावर टू चेक द वैलिडिटी ऑफ़ अ स्टेटमेंट्स। बट ये जो स्टेटमेंट्स हैं क्या हम क्वेश्चनिंग स्टेटमेंट्स या ऑर्डरिंग स्टेटमेंट या किसी भी तरीके का स्टेटमेंट्स यूज कर सकते हैं? नहीं ऐसा

नहीं है। हम वही टाइप के स्टेटमेंट्स यूज़ करते हैं जिनके दो पहलू होते हैं। अब ये जो स्टेटमेंट्स हैं वो दो तरीके के स्टेटमेंट्स होते हैं। एक स्टेटमेंट को हम सिंपल कहते हैं। दूसरे को हम कंपाउंड कहते हैं। अब सिंपल और कंपाउंड पहले हम लोग पढ़ लेते हैं थोड़ा सा। फिर उसके बाद में हम डिटेल में जाएंगे और हर एक चीज के बारे में यहां पर बात करेंगे। तो परेशान नहीं होना है। ठीक है? सब चीज आ जाएगी आप लोगों को। ठीक है? देखो, अब अगर मैं आप लोगों को

बोलूं एक सिंपल सी बात यहां पर ध्यान में देखना कि सिंपल वाले ऐसे स्टेटमेंट्स होते हैं जिनको हम ब्रेक नहीं कर सकते। मतलब वो ब्रेकेबल नहीं होते हैं। फॉर एग्जांपल माय नेम इज सतीश यादव। अब ये एक सिंपल प्रपोजिशनल स्टेटमेंट है। क्यों? क्योंकि आप इसको ब्रेक नहीं कर सकते। लेकिन जो कंपाउंड प्रपोजिशनल स्टेटमेंट होता है उसको आप ब्रेक कर सकते हो। ब्रेक करके या तो आप दो सिंपल बना लो या तो मतलब तीन सिंपल बना लो। वो डिपेंड करता है

स्टेटमेंट के ऊपर। अब जैसे मैंने लिखा 5 इज > 3 ये क्या है? ये स्टेटमेंट ट्रू है। या तो आपके पास में ऐसा भी स्टेटमेंट आ सकता है कि 5 इज लेस दैन 3 5 इज लेस < 3 मे बी ये आपका फॉर ये वाला स्टेटमेंट ट्रू है। ये वाला स्टेटमेंट फॉल्स है। लेकिन कंपाउंड वाले स्टेटमेंट ऐसे होते हैं। फॉर एग्जांपल जिनको आप दो या दो सिंपल प्रपोज़िशनल स्टेटमेंट में ब्रेक कर सकते

हो। अब जैसे मैं अगर ये स्टेटमेंट होगा तो इसको लिखूंगा 5 = 3 और 5 > 3 यही होता है। ये तो मैं मैथमेटिकल स्टेटमेंट लिख लिया। लेकिन अगर इसका विजुअलाइजेशन देखोगे तो विजुअलाइजेशन ऐसा होता है कि आपके पास में एक स्टेटमेंट होता है कंपाउंड स्टेटमेंट जिसको आप क्या कर सकते हो? दो या दो से ज्यादा सिंपल स्टेटमेंट में ब्रेक कर सकते हो। मतलब आपके पास में कंपाउंड होता है। इस कंपाउंड को आप क्या करते हो? ब्रेक

करते हो। दो से दो ज्यादा एक सिंपल यह हो गया और दूसरा सिंपल यह हो गया। इसको आप ब्रेक नहीं कर सकते। तो कंपाउंड एक ऐसे प्रपजीिशनल स्टेटमेंट्स होते हैं जिनको आप दो या दो से ज्यादा सिंपल प्रपोजिशनल स्टेटमेंट में ब्रेक करते हो। ये क्या है?

ये स्टेटमेंट्स हैं। जैसा मैं फिर से बता देता हूं। स्टेटमेंट दो तरीके के होते हैं। एक सिंपल होता है, एक कंपाउंड होता है। सिंपल को आप ब्रेक नहीं कर सकते हो। कंपाउंड को आप ब्रेक कर सकते हो। लेकिन जब आप कंपाउंड को ब्रेक करते हो तो कहां पर ब्रेक करते हो? तो यह जो इसको हम लोग बेसिकली ब्रेकिंग पॉइंट्स बोलते हैं या तो हम इसे कनेक्टिव्स भी बोलते हैं। ठीक है?

तो हमारे पास में क्या है? कनेक्टिव्स हैं। अब कनेक्टिव्स जो है वो अलग-अलग तरीके के कनेक्टिव्स होते हैं। जैसे कि कंजक्शन हो गया, डिजंक्शन हो गया, सिंगल इंप्लिकेशन हो गया, डबल इंप्लिकेशन हो गया। मैं पूरा तो ठीक है। ठीक है? पूरा तो डिस्कशन करने का कोई मतलब है नहीं। मतलब मैं थोड़ा-थोड़ा बताते चलूंगा। अब जैसे सीधी सी बात है कि इनके ट्रुथ टेबल के ऊपर इतना फोकस नहीं करेंगे।

अब जैसे पहला जो हो गया जिसको हम लोग क्या कहते हैं? कंजक्शन कहते हैं। ठीक है? कंजक्शन हो गया। फिर हमारे पास में एक दूसरा हो गया जिसको हम लोग क्या कहते हैं? डिजंक्शन हो गया। ठीक है? और फिर हमारे पास में एक होता है सिंगल इंप्लिकेशन और सिंगल इंप्लिकेशन या इसको कंडीशनल स्टेटमेंट भी बोला जाता है। या तो आप इसे कह दो सिंगल इंप्लिकेशन या तो आप इसे डबल इंप्लिकेशन भी कह सकते हो। ठीक है? डबल

इंप्लिकेशन या तो आप सिंगल इंप्लिकेशन कह लो या तो आप इसे डबल इंप्लिकेशन कह लो। ठीक है? जैसा कि मैंने आपको बताया कि कनेक्टिव्स जो है वो दो चार टाइप के होते हैं। पहला कंजक्शन, डिजंक्शन, सिंगल इंप्लिकेशन, डबल इंप्लिकेशन। कंजक्शन जो होता है दैट इज रिलेटेड टू एंड ठीक है इट इज रिलेटेड टू एंड डिजंक्शन इट इज रिलेटेड टू और ये आपका सिंगल इंप्लिकेशन हो गया और

ये आपका क्या हो गया डबल डबल इंप्लिकेशन तो ये सिंगल इंप्लिकेशन हो गया और ये आपका क्या हो गया डबल इंप्लिकेशन तो सब लोगों को एंड का टेबल पता होता है। सब लोगों को और का टेबल पता होता है। लेट्स नॉट स्पेंड मच टाइम ऑन दैट क्योंकि ऑलरेडी हम लोग क्रैश कोर्स पढ़ रहे हैं। बट स्टिल मैं आप लोगों को टेबल एक बार ड्रॉ कर रहा हूं क्योंकि इट्स माय ड्यूटी टू टेल यू ऑल दिस। ठीक है? गेटिंग माय

पॉइंट एवरीवन प्लीज रिप्लाई। ठीक है? तो जैसा कि मैंने आपको बताया कि कनेक्टिव्स आया कहां से? अगर हमारे पास में कंपाउंड प्रपजीिशनल स्टेटमेंट होता है तो जब आप कंपाउंड प्रपजीिशनल स्टेटमेंट को ब्रेक करते हो दो या दो से ज्यादा सिंपल प्रपजीिशनल स्टेटमेंट में तो इसके ब्रेकिंग इसका ब्रेकिंग पॉइंट होता है या जिसे हम लोग कनेक्टिव्स कहते हैं। तो इन्हीं कनेक्टिव मतलब जैसे ये फॉर

एग्जांपल माय नेम इज सतीश यादव एंड टुडे इज़ रेनिंग। अगर मैं ये स्टेटमेंट लिखूं माय नेम इज़ सतीश यादव एंड टुडे इज़ रेनिंग। तो आप इसको ब्रेक करके दो या दो से ज्यादा सिंपल प्रपजीिशन स्टेटमेंट में बनाओगे। तो जब आप ब्रेक करते हो तो कहां ब्रेक करते हो? तो अब उसके लिए आ गया आपके पास में एंड की कंडीशन। तो ये जो एंड है वहीं पर ब्रेक करते हो। तो उसको हम लोग क्या कहते हैं? कनेक्टिव्स कहते हैं।

ठीक है? तो उसको ही हम लोग एंड कहते हैं। तो जैसा कि मेनली हमारे पास में और भी तरीके के कनेक्टिव्स होते हैं। लेकिन हम लोग जो है मेनली ये पढ़ते हैं। कंजक्शन हो गया, डिजंक्शन हो गया, सिंगल इंप्लिकेशन हो गया, डबल इंप्लिकेशन हो गया। कंजक्शन, डिजंक्शन, सिंगल इंप्लिकेशन, डबल इंप्लिकेशन। इसके ट्रुथ टेबल के बारे में हम बात नहीं कर रहे हैं। बिना ट्रुथ टेबल के ही हम आगे बढ़ रहे हैं। ठीक है? अगर किसी को जरूरत होगी तो वह लिख देना कमेंट में। अदरवाइज़ वी विल मूव अहेड। या आप

Google भी कर सकते हो एंड का टेबल क्या होता है? और का टेबल क्या होता है? सिंगल इंप्लिकेशन का क्या होता है? डबल इंप्लिकेशन का क्या होता है? बहुत इजी है। उसके ऊपर हम टाइम स्पेंड नहीं करेंगे क्योंकि हमें बहुत सारी चीजें पढ़नी है। तो हम लोग आगे मूव करते हैं। ठीक है? अब टेबल तो सब लोगों को पता है। आई होप ये स्लाइड आप लोगों को क्लियर हो गई होगी। अब मेरा जो मेन टॉपिक है वो बेसिकली यह है कि समझो कि अगर आपने यह

एक्सप्रेशन बनाया मतलब चार डेफिनेशन है वो चार डेफिनेशन अगर हम लोग पढ़ लिए तो अपने को इजी हो जाएगा। अब जैसे मैं अगर एक सिंपल सा टेबल बनाने की कोशिश करता हूं क्योंकि मेरे को थोड़ा सा टेबल की जरूरत है। जैसे मैंने यहां पर p लिख लिया। मैंने यहां पर q लिख लिया और ये p इंप्लाइस q का मैं टेबल बनाना चाहता हूं। तो अब अगर मैं यहां पर ट्रू लिखूंगा। ये ट्रू लिखूंगा तो ये मेरा ट्रू हो गया। ये मैंने ट्रू लिख दिया और ये मैंने फॉल्स लिख दिया। सो दिस विल बिकम फॉल्स। ये मेरा फॉल्स हो गया। ये

ट्रू हो गया। दिस स्टेटमेंट विल बिकम ट्रू। अगर ये फॉल्स हुआ और ये फॉल्स हुआ तो ये ट्रू हो गया। अब ना ये लास्ट वाला एक्सप्रेशन देखना। तो अगर किसी भी टेबल में ध्यान से सुनना। अगर किसी भी टेबल में ये जो लास्ट एक्सप्रेशन मतलब ये जो रिजल्ट है और यहां पर अगर हमें एटलीस्ट वन ट्रू आ गया। ठीक है? एटलीस्ट वन ट्रू आ गया। अगर हमें कम से कम एक ट्रू आ गया तो इस

Frequently asked questions

लॉजिक में हम उन्हीं स्टेटमेंट्स के बारे में बात करते हैं जिनके दो पहलू होते हैं, यानी या तो वो ट्रू होगा और या तो वो फॉल्स होगा।

स्टेटमेंट्स दो तरीके के होते हैं, जिसमें एक को सिंपल स्टेटमेंट और दूसरे को कंपाउंड स्टेटमेंट कहा जाता है।