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Complete Computer Science Course in 17 Hours | Bihar STET 2026 Paper 2 | Class 11–12 | PYQ Practice – Transcript

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Summary

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  • इस वीडियो में 2025 के पीवाईक्यूस और चारों शिफ्ट्स के 400 सवालों के एनालिसिस के आधार पर कंप्यूटर साइंस के पूरे सिलेबस को कवर किया गया है।
  • पाइथन एक हाई लेवल, इंटरप्रेटेड, डायनामिकली टाइप्ड, केस सेंसिटिव और ओपन सोर्स लैंग्वेज है जिसे ग्वीडो वैन रोसम ने 1991 में रिलीज किया था।
  • एक्सपर्ट सिस्टम के पांच मुख्य कॉम्पोनेंट्स नॉलेज बेस, इनफेंस एज, यूजर इंटरफेस, एक्सप्लेनेशन फैसिलिटी और नॉलेज एक्विजिशन हैं।
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Transcript

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वेलकम टू एसएससी गुरु टॉक्स। नमस्कार दोस्तों। अगर आप बीएससीबी एसटेट पेपर टू कंप्यूटर साइंस क्लास 11 12 की तैयारी कर रहे हैं, तो आज का यह वीडियो आपके लिए बेहद इंपॉर्टेंट होने वाला है। दोस्तों, आज के इस कंप्लीट वन शॉट में हम कंप्यूटर साइंस के 100 मार्क्स के पूरे सिलेबस के सभी 17 पार्ट्स को कवर करेंगे। सबसे पहले नेटवर्किंग एंड इंटरनेट फिर डीबीएमएस एंड एसक्यूएल थ्योरी ऑफ कंप्यूटेशन आईओटी एंड

इंडस्ट्री 4.0 डिजिटल लॉजिक एंड नंबर सिस्टम ओपी ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम वेब टेक्नोलॉजी पython सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग डेटा स्ट्रक्चर्स एल्गोरििदम्स डिज़ एंड एनालिसिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई साइबर सिक्योरिटी एंड एथिक्स कंप्यूटर ऑर्गेनाइजेशन एंड माइक्रो कंट्रोलर मल्टीमीडिया एंड ग्राफिक्स और अंत में ई-कॉमर्स और सबसे खास खास बात इस पूरे

कंटेंट को 2025 के पीवाईक्यूस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हमने 2025 के चारों शिफ्ट्स के कुल 400 सवालों का एनालिसिस करके यह समझने की कोशिश की है कि किस टॉपिक से कितने सवाल पूछे गए और किन टॉपिक्स पर ज्यादा फोकस करना चाहिए। दोस्तों, इस एनालिसिस के अनुसार नेटवर्किंग एंड इंटरनेट से चारों शिफ्ट्स में लगभग 70 सवाल, डीबीएमएस एंड एसक्यूएल से 41 और थ्योरी ऑफ़ कंप्यूटेशन से 27 सवाल देखने को मिले। इसलिए इन जैसे इंपॉर्टेंट

टॉपिक्स को अपनी प्रिपरेशन में प्रायोरिटी जरूर दीजिए। लेकिन सिर्फ सिलेबस पूरा करना हमारा लक्ष्य नहीं है। हमारा लक्ष्य है स्मार्ट स्टडी, सही रिवीजन और ज्यादा से ज्यादा सवालों को सही हल करने की तैयारी। इसलिए वीडियो देखते समय चार बातें जरूर याद रखिए। पहली बात रिवीजन का सही क्रम फॉलो कीजिए। नेटवर्किंग, डीबीएमएस, आईओटी, टीओसी, डिजिटल लॉजिक और पाइथन जैसे टॉपिक्स को प्रायोरिटी देकर बार-बार

रिवाइज करें। दूसरी बात, हर पार्ट के बाद एमसीक्यूस की प्रैक्टिस जरूर करें। सवालों को खुद सॉल्व करने की कोशिश करें ताकि आपकी अंडरस्टैंडिंग मजबूत हो। तीसरी बात, परीक्षा की तैयारी में पहले पार्ट टू और पार्ट थ्री को समय देकर तैयार करें। फिर कंप्यूटर साइंस के बाकी टॉपिक्स पर काम करें। नियमित रिवीजन और प्रैक्टिस जारी रखें। और चौथी बात इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं है। इसलिए कोई भी सवाल खाली मत छोड़िए। सभी सवालों को अटेम्प्ट करने

की कोशिश कीजिए। और जहां जवाब पक्का ना हो वहां भी ऑप्शंस को ध्यान से देखकर अपना बेस्ट आंसर चुनिए। दोस्तों वीडियो को अंत तक जरूर देखिए क्योंकि हम कंप्यूटर साइंस के सभी 17 पार्ट्स को एक ही जगह कवर करने वाले हैं। वो भी 2025 के पीवाईक्यू एनालिसिस को ध्यान में रखकर। वीडियो हेल्पफुल लगे तो लाइक कीजिए अपने एसटेट एस्पिरेंट दोस्तों के साथ शेयर कीजिए और एसएससी गुरु टॉक्स को सब्सक्राइब करना मत भूलिए। तो चलिए दोस्तों बिना देर किए शुरू करते हैं बीएसईबी एसटेट कंप्यूटर साइंस

कंप्लीट वन शॉट। अब बात करेंगे नेटवर्किंग और इंटरनेट की और बिना टाइम वेस्ट किए हम सीधा नेटवर्क की बेसिक से शुरू करते हैं क्योंकि यह एग्जाम के लिए बहुत जरूरी है। तो नेटवर्क असल में है क्या? अगर सिंपल भाषा में बोलूं दोस्तों तो दो या ज्यादा कंप्यूटरटर्स या डिवाइसेस का आपस में जुड़ना ही नेटवर्क कहलाता है। हां बिल्कुल। और यहां सबसे बड़ा जो कीवर्ड है ना वो है शेयरिंग। राइट? अगर डिवाइसेस कनेक्टेड हैं पर कुछ

शेयर नहीं कर रहे तो उसका कोई मतलब नहीं है। नेटवर्क का असली मकसद उसकी पूरी आत्मा ही डाटा और रिसोर्सेज को शेयर करना है। एक प्रिंटर को पूरे ऑफिस या लैब के कंप्यूटरटर्स के साथ शेयर करना इसका सबसे बेसिक एग्जांपल है। सही बात है। अब देखो नेटवर्क बन तो गया पर सवाल यह है कि एक नेटवर्क आखिर कितनी दूर तक फैल सकता है? इसे एरिया के हिसाब से कैसे बांटते हैं? वो देखते हैं। तो सबसे छोटा होता है पैन। सही कहा। पैन यानी पर्सनल एरिया नेटवर्क।

इसका जो एरिया है वह लगभग 10 मीटर का होता है। सिर्फ 10 मीटर। मतलब एकदम पर्सनल स्पेस के अंदर है ना? जैसे अपना ब्लूटूथ हो गया। लेकिन यहां एग्जाम के लिए एक और नाम याद रखना बहुत-बहुत जरूरी है दोस्तों और वो है जिगबी। Z आई जी बी ईई जिगबी। एग्जैक्टली जिग भी ब्लूटूथ की तरह ही 10 मीटर के दायरे में काम करता है और पैन का ही हिस्सा है। तो फिर दोनों में फर्क क्या हुआ? देखिए ब्लूटूथ हम यूज करते हैं गाने सुनने के

लिए जहां डाटा कंटीन्यूअसली जाता है। पर जिगबी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वो बहुत कम बैटरी खर्च करें। ओ अच्छा। हां जैसे अपने स्मार्ट बल्ब्स या घर के सेंसर्स जो महीनों तक छोटी बैटरी पर चलते हैं उनमें जिगबी का इस्तेमाल होता है। ये बहुत क्लियर हो गया। अब पैन से थोड़ा बड़ा एरिया लेते हैं जो है लन यानी लोकल एरिया नेटवर्क। ये समझ लो कि एक बिल्डिंग या एक कैंपस तक ही सीमित होता है। हां। जैसे अपने स्कूल की कंप्यूटर लैब

होती है या फिर किसी ऑफिस की पूरी बिल्डिंग जहां सारे कंप्यूटरटर्स लैंड से जुड़े होते हैं। बिल्कुल। और उसके बाद अगर एरिया पूरे शहर का हो जाए तो अगर पूरे शहर को कवर करना हो तो वहां आता है मैन यानी मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क। इसका सबसे परफेक्ट एग्जांपल पता है क्या है? अपने शहर का केबल टीवी नेटवर्क। सही पकड़ा। केबल टीवी नेटवर्क पूरे सिटी को कवर करता है। और इसके बाद आखरी और सबसे बड़ा एरिया आता है वैन का। वाइड एरिया

नेटवर्क। जो देश और पूरी दुनिया को कवर करता है। है ना? बिल्कुल। जब किसी देश या पूरी दुनिया को जोड़ना हो तो वैन का यूज़ होता है। और दोस्तों इसका सबसे बड़ा एग्जांपल हमारा इंटरनेट ही है। इंटरनेट। तो स्टूडेंट्स यहां एक छोटी सी एनालॉजी बनाते हैं इसे पक्का याद रखने के लिए। पैन अपना कमरा है। लैन अपनी पूरी बिल्डिंग है। मैन अपना शहर है और वैन पूरी दुनिया है। वाह। ये याद रखने का बहुत आसान तरीका है।

कमरा, बिल्डिंग, शहर और दुनिया। राइट। अब एरिया तो हम समझ गए। पर इन नेटवर्क्स में डाटा आखिर ट्रैवल कैसे करता है? मतलब आपस में बात करने के तरीके क्या हैं? इसे कहते हैं कम्युनिकेशन मोड्स। तो इसमें तीन मोड्स आते हैं। सबसे पहला है सिंप्लेक्स मोड। हां। सिंप्लेक्स मोड में क्या होता है कि डेटा सिर्फ एक ही डायरेक्शन में जाता है। सिर्फ एक दिशा में। मतलब एक बोलेगा और दूसरा सिर्फ सुनेगा। एग्जैक्टली। इसका सबसे बेस्ट एग्जांपल है

रेडियो, टीवी और कंप्यूटर का कीबोर्ड। कीबोर्ड से सिर्फ कमांड अंदर जाती है। वापस बाहर कुछ नहीं आता। बिल्कुल सही। अब दूसरा तरीका आता है जहां डाटा दोनों तरफ जा सकता है। इसे कहते हैं हाफ डुप्लेक्स मोड। पर यहां एक सख्त शर्त है। डाटा दोनों दिशाओं में जाएगा जरूर पर एक समय पर सिर्फ एक ही तरफ से बात होगी। जैसे वो अपना वॉकी टॉकी होता है। हां बिल्कुल वही। उसमें एक तरफ से बोलते हैं फिर कहते हैं ओवर ताकि दूसरा आदमी बोल सके। ओवर एंड आउट

वाली पूरी फील आती है इसमें। सही कहा। फिर तीसरा मोड आता है फुल डुप्लेक्स मोड। इसमें दोनों दिशाओं में एक ही वक्त पर बातचीत हो सकती है। जैसे हमारा मोबाइल फोन कॉल। मोबाइल पर कॉल करते वक्त दोनों लोग एक साथ बोल सकते हैं और दोनों की आवाज आएगी भी, फोन जाएगी भी। है ना?

एकदम सही। और इन सब मोड्स को जब हम पढ़ते हैं तो यहां एक टर्म बहुत जरूरी हो जाता है समझना और वो है बैंडविड्थ। हां, बैंडविड्थ बहुत बार सुनने मिलता है। पर एग्जाम के हिसाब से इसकी सटीक डेफिनेशन क्या होगी? देखिए किसी चैनल पर एक तय समय में ज्यादा से ज्यादा कितना डाटा भेजा जा सकता है वही उसकी बैंडविड्थ होती है। मतलब एक फिक्स टाइम पर कितना डाटा गुजर सकता है उस पाइप से और दोस्तों इसकी यूनिट याद रखना बहुत जरूरी है। इसे हम बीपीएस

यानी बिट्स पर सेकंड में नापते हैं। जैसे कि केबीपीएस, एमबीपीएस या जीबीपीएस। बिल्कुल सही। अब डाटा और स्पीड तो तय हो गई। पर इस डाटा को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्ता कैसे मिलता है? यहां हम आते हैं स्विचिंग के तरीकों पर। स्विचिंग मतलब रास्ता निकालना। तो पहला तरीका है सर्किट स्विचिंग। यहां एक डेडिकेटेड रास्ता बनता है। पहले से ही एक फिजिकल कनेक्शन सेट होता है। हां। जैसे पुरानी टेलीफोन लाइंस होती थी

ना उनमें बात शुरू होने से पहले एक डेडिकेटेड सर्किट या रास्ता बनता था और सारा डाटा उसी रास्ते से जाता था। पर उसमें एक बड़ी प्रॉब्लम थी कि वो रास्ता ब्लॉक हो जाता था। रिसोर्स वेस्ट होते थे। तो इसे सॉल्व करने के लिए आया दूसरा तरीका जो बहुत इंपॉर्टेंट है। मार्क करिएगा इसको दोस्तों और वो है पैकेट स्विचिंग। पैकेट स्विचिंग सच में बहुत जरूरी है। इसमें पूरे डाटा को छोटे-छोटे पैकेट्स में तोड़ दिया जाता है। फिर वो छोटे पैकेट्स आगे कैसे जाते हैं?

हर एक पैकेट अपना सबसे बेस्ट रास्ता खुद चुनता है। अगर एक रास्ते पर ट्रैफिक ज्यादा है तो वो पैकेट दूसरा रास्ता पकड़ लेगा। किसी एक फिक्स रास्ते की जरूरत ही नहीं पड़ती इसमें। वाह। और दोस्तों हमारा जो इंटरनेट है और जो वॉइप होता है यानी वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल ये दोनों इसी पैकेट स्विचिंग टेक्नोलॉजी पर ही चलते हैं। एकदम सही। इसके बाद तीसरा तरीका आता है मैसेज स्विचिंग का। उसमें क्या प्रोसेस है?

इसमें पूरा का पूरा मैसेज किसी इंटरमीडिएट नोड पर यानी बीच के रास्ते में जहां वो पहुंचता है वहां स्टोर होता है। और फिर जब आगे का रास्ता क्लियर दिखता है तो वहां फॉरवर्ड कर दिया जाता है। ओह अच्छा मतलब बीच में पहले स्टोर करो और फिर आगे फॉरवर्ड करो। समझ गया? अच्छा इन सब रास्तों से अगर डेटा जल्दी भेजना हो तो उसके साइज को कम ही करना पड़ता है ना। इसे डेटा कंप्रेशन कहते हैं। बिल्कुल। डेटा कंप्रेशन से फाइल का साइज

सिकुड़ कर छोटा हो जाता है ताकि वो कम बैंडविड्थ ले और फटाफट जल्दी पहुंचे। ये नेटवर्क को बहुत ही एफिशिएंट बना देता है। सही बात है। अब बात करते हैं उन असली तारों या वेव्स की जो इस डेटा को ढोकर ले जाती हैं। हां, जिसे हम ट्रांसमिशन मीडिया कहते हैं। इसके दो टाइप होते हैं। गाइडेड और अनगाइडेड। गाइडेड [नाक से की जाने वाली आवाज़] मतलब वाइड मीडिया तार वाली चीजें। इसमें पहला है ट्विस्टेड पेयर केबल। और दोस्तों इस ट्विस्टेड पेयर में भी दो कैटेगरीज आती

हैं। पहली यूटीपी यानी अनशील्डेड ट्विस्टेड पेयर। यूटीपी के जो सबसेेंट एग्जांपल्स हैं वो हैं कैट 5, कैट 5 ई और कैट सिक्स केबल्स। राइट। और ये मोस्टली लन में यूज़ होती हैं। अपने वही RJ45 कनेक्टर के साथ जिससे लैब में कंप्यूटर जोड़ते हैं। है ना?

हां। और दूसरी कैटेगरी इसमें होती है एसटीपी यानी शील्डेड ट्विस्टेड पेयर। इसमें ऊपर से एक शील्ड लगी होती है। हां। उस शील्डिंग की वजह से इसमें नॉइज़ या जो रुकावट आती है वो काफी कम आती है एज कंपेयर टू यूटीपी। अच्छा फिर ट्विस्टेड पेयर के बाद जो दूसरी केबल है वो है कोएशियल केबल। दोस्तों ये केबल अपनी वही केबल टीवी नेटवर्क वाली मोटी काली तार है। बिल्कुल सही। और इन केबल्स के बाद एक बहुत ही खास और एडवांस्ड वायर्ड मीडिया आता है।

ऑप्टिकल फाइबर। इस पे ध्यान देना दोस्तों बहुत जरूरी है ऑप्टिकल फाइबर क्योंकि इसमें डेटा करंट के रूप में नहीं बल्कि लाइट यानी रोशनी के रूप में ट्रैवल करता है। एक्जेक्टली और ये एक फिजिक्स के थ्योरी पर काम करता है जिसे कहते हैं टोटल इंटरनल रिफ्लेक्शन। पर क्या रोशनी तार में स्ट्रेट नहीं जाएगी? तार मुड़ेगी तो लाइट बाहर निकल जाएगी दीवार तोड़कर। यही तो उस टोटल इंटरनल रिफ्लेक्शन का कमाल है। लाइट अंदर उस पतले शीशे की दीवारों से टकरा कर वापस अंदर बाउंस होती रहती है। स्पीड भी इसकी सबसे

ज्यादा होती है। और क्योंकि वो लाइट है तो उस पर किसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस यानी ईएमआई का भी कोई असर नहीं होता। है ना? बिल्कुल नहीं। उसमें सिग्नल्स बिल्कुल करप्ट नहीं होते। बस एक कमी ये है कि ऑप्टिकल फाइबर लगाना काफी महंगा पड़ता है। सही है। अब आते हैं अनगाइडेड मीडिया पर। मतलब वायरलेस तरंगे। इसमें पहला नाम है रेडियो वेव्स। हां। और रेडियो वेव्स जो होती है ना वो ऑल डायरेक्शंस में यानी सभी दिशाओं में ट्रैवल करती हैं।

इसीलिए इनको डायरेक्ट एक दूसरे को फेस नहीं करना पड़ता। दूसरा आता है माइक्रोवेव्स। माइक्रोवेव्स के लिए लाइन ऑफ साइट यानी आमने-सामने होना जरूरी होता है क्या? बिल्कुल जरूरी होता है। इसमें ट्रांसमीटर और रिसीवर को बिल्कुल आमने-सामने रखना पड़ता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है अपना सेटेलाइट कम्युनिकेशन। राइट? जैसे छत पर डिश एंटीना रखा हो एक फिक्स दिशा में। और तीसरा वायरलेस मीडिया कौन सा है?

वो है इंफ्रारेड। यह वेव सिर्फ बहुत ही कम दूरी के लिए काम आती है। मतलब हमारा टीवी रिमोट वही है ना वो भी कम डिस्टेंस तक ही चलता है। एकदम सही पकड़ा। अपने टीवी रिमोट में इंफ्रारेड वेव्स ही होती हैं। वाह! क्लियर हो गया। अब दोस्तों एग्जाम के हिसाब से एक सबसे इंपॉर्टेंट चीज। इन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स का एक ऑर्डर एक सीक्वेंस पूछा जाता है और यहां बच्चे बहुत कंफ्यूज होते हैं। हां, यह सीक्वेंस बढ़ती हुई फ्रीक्वेंसी यानी इंक्रीजिंग फ्रीक्वेंसी के ऑर्डर में

हमें लगाना पड़ता है। तो तैयारी करने वालों इस ऑर्डर को नोट करिएगा। मैं और मैम मिलकर इस ऑर्डर को एक-एक करके बताते हैं। ध्यान दीजिएगा। सीक्वेंस में सबसे पहले आएगा रेडियो। रेडियो के बाद आएगी माइक्रोवेव। फिर आएगी इंफ्रारेड। उसके बाद विज़िबल लाइट। फिर यूवी यानी अल्ट्रावायलेट। उसके बाद एक्सरे और लास्ट में आएगी गामा। तो ऑर्डर हो गया रेडियो, माइक्रोवेव, इंफ्रारेड, विज़िबल लाइट, यूवी, एक्सरे और गामा। यह है बढ़ती

हुई फ्रीक्वेंसी का क्रम। पर यहां एक बहुत ही इंपॉर्टेंट वार्निंग याद रखना। एग्जाम में पेपर सेट करने वाले यह कैच डालते हैं। अगर उन्होंने वेवलेंथ यानी तरंगदैध्य का सीक्वेंस पूछ लिया, तो क्या करोगे? याद रखना। वेवलेंथ का क्रम इस फ्रीक्वेंसी वाले क्रम का बिल्कुल उल्टा यानी रिवर्स होता है। बिल्कुल रिवर्स दोस्तों। फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो वेवलेंथ घटेगी। यह बात आज ही दिमाग में बिठा लो। सही बात है। वेवलेंथ पूछा तो ऑर्डर गामा से शुरू होकर रेडियो पर खत्म होगा।

क्या बात है? परफेक्ट। तो दोस्तों फटाफट एक रिवीजन समरी ले लेते हैं। आज हमने समझा नेटवर्क के टाइप्स पैन से वैन तक। फिर कम्युनिकेशन मोड्स देखे सिंप्लेक्स की वन वे लाइन से लेकर फुल डुप्लेक्स वाले फोन कॉल्स तक। हां। और हमने स्विचिंग के तरीकों को भी डिटेल में कवर किया कि पुरानी सर्किट स्विचिंग से आगे बढ़कर पैकेट स्विचिंग तक कैसे आए। सही और लास्ट में हमने ट्रांसमिशन मीडिया और इन सभी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स का ऑर्डर भी कंप्लीटली समझ लिया है। बिल्कुल।

Frequently asked questions

पाइथन को ग्वीडो वैन रोसम ने 1991 में रिलीज किया था।

डिटरमिनिस्टिक फाइनाइट ऑटोमेटन पेलेंड्रोम स्ट्रिंग इसलिए नहीं पहचान सकता क्योंकि इसके पास मेमोरी या स्टैक नहीं होता है।

एक्सपर्ट सिस्टम के पांच मुख्य कॉम्पोनेंट्स नॉलेज बेस, इनफेंस एज, यूजर इंटरफेस, एक्सप्लेनेशन फैसिलिटी और नॉलेज एक्विजिशन हैं।