MSD DANIYAL · Transcript · · Updated
मरने के बाद मुर्दे के पैर के अंगूठे क्यों बाँधे जाते हैं? | Islamic Knowledge | MSD Daniyal – Transcript
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Summary
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- जब इंसान का इंतकाल होता है तो निगाह अपनी रूह का पीछा करती है जिसके कारण मृतक की आंखें खुली रह जाती हैं, जिन्हें नरमी के साथ बंद करना सुन्नत से साबित है।
- रूह निकलने के दौरान सांस लेने की कोशिश में इंसान का मुंह फैल जाता है, और चेहरा भयानक न लगे इसलिए जबड़े पर पट्टी बांधी जाती है।
- रूह कब्ज होने पर बदन अकड़ने लगता है और दफन करने में कोई परेशानी न हो, इसलिए बॉडी गर्म होने पर पैरों के अंगूठों को बांध दिया जाता है।

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Transcript
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जब किसी का इंतकाल हो जाता है तो उसके दोनों पैरों के अंगूठों को इस तरीके से किसी कतर से किसी धागे वगैरह से या किसी चीज से रुमाल वगैरह से बांध दिया जाता है। आखिर दोनों पैरों के अंगूठों को एक साथ मिलाकर क्यों बांधा जाता है? इसकी वजह क्या है? अभी मैं इस वीडियो के अंदर आपको बताने के लिए जा रहा हूं। और दूसरा सवाल ये है कि जब इंसान का इंतकाल हो जाता है
तो उसके जबड़े पर इस तरीके से पट्टी क्यों बांधी जाती है? आपने जब मयत का चेहरा वगैरह देखने के लिए जाते हैं इंतकाल के बाद तो बहुत सारे लोगों ने देखा होगा कि इस तरीके से यहां से ले पूरा कोई रुमाल वगैरह बंधा होता है या कोई कतर वगैरह बांध दी जाती है। और तीसरा सवाल ये है कि मरने के बाद मयत की आंखों को बंद क्यों किया
जाता है? इन तीनों बातों को मैं आपको इस वीडियो के अंदर बताने के लिए जा रहा हूं। बड़े ध्यान और बड़ी तवज्जो से आप समात करें। तो देखिएगा आंखें क्यों बंद की जाती? जब इंसान का इंतकाल हो जाता है ना तो मरने वाला इंसान फरिश्तों को देखता है। और जब उसकी रूह कब्ज होती है और रूह कब्ज करके हजरत मलकुल मौत हजरत इजराइल अल सलातो अस्सलाम जब रूह निकाल कर के लेके जाते हैं
तो मरने वाला इंसान अपनी रूह को देखता रहता है। देखता रहता है। यानी निगाह जो है रूह को ले जाते हुए देखती है। तो निगाह अपनी रूह का क्या करती है? पीछा करती है। इसलिए आंखें मुर्दे की खुली रह जाती है। इसके ताल्लुक से हदीस पाक है। सही मुस्लिम शरीफ के अंदर हदीस पाक है। हजरत उम्मे सलमा रज़ अल्लाहहु ताला अन्हा बयान फरमाती
हैं कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु ताला अलैह वसल्लम जब हजरत अबू सलमा रज़ अल्लाहहु ताला अनहु के पास तशरीफ़ लाए। जब हजरत अबू सलमा रज़ अल्लाहहु ताला अनहु का विसाल हुआ और जब आप उनके पास तशरीफ़ लाए तो क्या देखते हैं कि उस वक्त उनकी आंखें खुली हुई थी। तो हुजूर सल्लल्लाहु ताला अलह वसल्लम ने अपने मुबारक हाथों से हजरत अबू सलमा रज़
अल्लाहहु ताला अनू की आंखों को बड़ी नरमी के साथ आपने बंद फरमा दिया। और बंद करने के बाद इरशाद फरमाया कि बेशक जब रूह कबज़ की जाती है तो निगाह अपनी उस रूह का पीछा करती है। इसलिए आंखें खुली रह जाती हैं। तो आंखों को बंद करना ये सुन्नत से साबित है। तो किसी के घर में अगर इंतकाल हो जाता
है तो आपने देखा होगा कि उसकी आंखों को बड़े प्यार और मोहब्बत से इस तरीके से बंद कर दिया जाता है। और दूसरी वजह इसकी ये भी बताई है। अगर आंखें बंद नहीं की तो देखने वालों को उससे बहशत मालूम होती है और खौफ भी लगता है। डर महसूस होता है और चेहरा बहुत ज्यादा भयानक लगता है। तो इसलिए आंखों को बंद कर देने से चेहरा एकदम खूबसूरत और बहुत ज्यादा प्यारा लगने लगता है। तो अगर किसी की आंखें खुली रह जाए तो
उसको नरमी के साथ बंद कर देना ये सुन्नत से साबित है। नंबर दो यहां पर पट्टी से क्यों बांध दिया जाता है? तो देखिए इसकी वजह ये है जब उसकी रूह निकलती है तो वो सांस लेने की कोशिश करता है। तो जाहिर सी बात है नाक से अगर सांस नहीं आ रही तो इस तरीके से इंसान मुंह फैलाता है ताकि मुझे सांस आ जाए। लेकिन जब रूह कब्ज हो जाती है तो फिर सांस आने का कोई मतलब नहीं रहता। तो सांस की वजह से मुंह इंसान फैला लेता है। लेकिन फिर वो जब रूह निकल जाती है तो
मुंह उसका फैला रह जाता है। आंखें खुली रह जाती है और मुंह फैला रह जाता है। तो इस तरीके से रूह निकलने के बाद में पट्टी बांधी जाती है ताकि चेहरा भयानक ना लगे। खौफजदा मालूम ना हो। इसकी वजह ये बताई गई है। अब आता है तीसरे नंबर पर कि पैर के दोनों अंगूठों को क्यों बांध दिया जाता है? सिर्फ इसकी वजह यह है कि देखिए जब इंसान की रूह कब्ज होती है तो अपने हाथ पैरों को फड़फड़ाता है। इधर-उधर हाथ पैर फेंकता है क्योंकि तकलीफ बहुत ज्यादा होती
है। तो अगर इस तरीके से एक टांग इधर है, एक इधर है, एक हाथ इधर है, एक इधर है। अगर दम निकलने के बाद रूह कबज़ होने के बाद उन हाथों को सीधा करके ना रखा गया या दोनों पैरों को इस तरीके से मिला के ना रखा गया तो फिर कब्र जो खोदी जाती है ना मयत की वो बिल्कुल मुर्दे के नाप तोल के बराबर बिल्कुल खोदी जाती है। तो अगर इधर-उधर हाथ पैर फैले रहे तो फिर जाहिर सी बात है दम
निकलने के बाद रूह निकलने के बाद में बदन अकड़ जाता है। अगर आप किसी की टांग मुड़ी रह गई या हाथ मुड़ा रह गया तो सीधा करने की कोशिश करेंगे तो जल्दी हाथ पैर सीधे नहीं होते हैं। जब बॉडी गर्म होती है तो उसी वक्त पैरों को बांध दिया जाता है। अंगूठों को बांध दिया जाता है ताकि दफन करने में कोई भी परेशानी कोई भी दिक्कत ना हो और गर्दन को इस तरीके से क़िबले की तरफ को फेर दिया जाता है। क्योंकि गर्दन भी फिर ऐट जाती है। जब दफन करते वक्त जब कब्र में
मुर्दे को रखा जाता है ना तो गर्दन को क़िबले की तरफ कर दिया जाता है। तो इस वजह से गर्दन को भी क़िबले की तरफ कर देते हैं। दोनों अंगूठों को बांध देते हैं। जबड़े पर पट्टी बांध देते हैं। आंखों को बंद कर देते हैं।