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KaalChakra:- गाय की सेवा करने से दूर होगा दुर्भाग्य | Pandit Suresh Pandey | Darshan24 – Transcript
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Summary
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- सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है।
- भविष्य पुराण और गरुड़ पुराण में गाय की सेवा और वैतरणी नदी पार करने के संबंध में महत्व बताया गया है।
- पंडित सुरेश पांडे जी ने नौ ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए गाय से जुड़े ज्योतिषीय उपाय बताए हैं।

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Transcript
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[संगीत] श्रद्धा और मेरे साथ हैं प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडे जी पंडित जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका नमस्कार
जी हान सनातन धर्म में गे को सबसे सर्वश्रेष्ठ और बहुमूल्य माना गया है गे के गोबर गोमूत्र से लेकर गे का दूध बेहद पवित्र और अनमोल है ऐसे में आज पंडित सुरेश पांडे जी आपको गे और नौ ग्रहों के बीच का कनेक्शन समझाएंगे कैसे गे की सेवा करने से और अलग-अलग चीज गे को खिलाने से आपके कुंडली में बैठे नौ ग्रह आपको शुभ फल
दे सकते हैं इसी से जुड़ा है आज का टॉपिक इसके अलावा अगर आपका कोई भी सवाल है तो हमें फोन करें हमारा फोन नंबर है 0 1 2 0 7652411 तो चलिए सबसे पहले शास्त्रों में गे के महत्व की बात करेंगे पंडित जी से जानेंगे की क्या शास्त्रों में कही गई ये बात सच है की गे के हर अंग में देवताओं का वास है ये जानते हैं पंडित जी से गे हमारी माता
है और हम हमेशा से यही सुनते आए हैं और गे पूजनीय हैं ये हम सुनते आए हैं नौ ग्रहों से इसका कनेक्शन तो जाऊंगी लेकिन वाकई में हर अंग में गे के देवता बसते हैं सनातन धर्म की मान्यता है की गे के शरीर में 33 वोट 33 को देवी देवताओं का वास होता है देखो यहां को माने करोड़ भी होता है कोर्ट
में प्रकार भी होता है यहां यही नहीं समझ लेना चाहिए 33 करोड़ 33 करोड़ जो है हमारे ये बात समझ में आती है 33 कोर्ट देवता है तो 33 कोर्ट देवी देवताओं का वास गे के शरीर में होता है जानते हैं धार्मिक दृष्टि कुछ भी हो लेकिन भारत की
अर्थव्यवस्था प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था कहां टिकी हुई थी गे पर रहीम दास जी क्या लिखते हैं गोधन गज धन बाजी धन और रतन धन खान जब आवे संतोष धन सावधान दूर समान इस बात से यह
बात प्रमाणित होती है की गे भारतीय अर्थव्यवस्था की मेरुदंड रही है गोधन गे सबसे बड़ा धन गज धन दूसरे नंबर पर हाथी बाजी नंबर पर घोड़ा धन और रतन धन खान और
उसके बाद हीरा पन्ना मोतीहारी जब आवे संतोष धन सब धन दूरी समान तो कहने का मतलब यह है भैया की भारत के अर्थव्यवस्था की मेरुदंड है गे और आज भी जिन घरों में गायों का पालन होता है जिन घरों में गे की सेवा होती है
यहां सचमुच में गे की सेवा की जाती है गे जहां पूजनीय और बंदनी है गे जिस समाज में आदरणीय और सुखी रहता है गे को जहां कष्ट दिया जाता है वहां चाहे जितना
पुरुषार्थ कर दिया जाए लेकिन अभाव वहां पर तांडव करता है इसमें कोई संसाय नहीं है भविष्य पुराण में कहा गया है की क्या कहा नित्यं ब्रह्मा विष्णु संस्कृत
महादेव सिंह की जड़ में ब्रह्मा और विष्णु प्रतिष्ठित होते हैं सिंह के अग्रवाल में चराचर समस्त तीर्थ प्रतिष्ठित होते हैं महादेव सिंह के मध्य भाग में प्रतिष्ठित
होते हैं और गया के ललाट में गौरी और nashtya के भाग में भगवान कार्तिकेय प्रतिष्ठित हैं 68 करोड़ तीर्थ और 33 करोड़ देवी देवताओं का चलता फिरता विग्रह गे है जो व्यक्ति गे की पीठ पर हाथ फेर देता है गे को मच्छर और
मक्खियों से बचाता है गौशाला की सफाई करता है उसे बहुत पुण्य मिलता है निष्काम भाव से गौ सेवा करने वाला गोदान के बराबर पुरी प्राप्त करता है ऐसा भी कहा गया है जो व्यक्ति गे के पानी पीने में रुकावट बनता है वो वहां पाप का भागी होता
है गरुड़ पुराण में कहा गया है की बेहतरीन नदी पार करने का एकमात्र साधन गे है 11वें दिन जब कोई व्यक्ति मार जाता है तो 11 दिन एकादश का श्राद्ध होता है और श्राद्ध में अंत में वैतरणी नदी पार uplakshan से कराई जाती है तो होता क्या है की यज्ञ मंडप के दक्षिण
दिशा में एक छोटी सी नाली नुमा गड्ढा कोड दिया जाता है 1 फीट चौड़ा 6 इंच गहरा और लगभग चार पंच फीट लंबा जो है एक गड्ढा कोड दिया जाता है और उसे गड्ढे को पानी से भर दिया जाता है गड्ढे के उत्तर तरफ गे को खड़ी कर दिया जाता है और उत्तर तरफ वही जिसके पूर्वज मारे हुए हैं वो हो जाता है वह गे की पुश पकड़ लेते हैं और सामने से
गे को कोई जरा सा हांक लगा देता है गे वो नाली डाक करके उसे पार चली जाती है और वो व्यक्ति भी उसे पार चला जाता है यही बेहतरीन नदी है और इसी को पार करना उपलक्ष से एकादश श्राद्ध में कहते हैं तो कहने का तात्पर्य यह है की गरुड़ पुराण में यही कहा गया है की वैतरणी नदी जिसमें बहुत ही कष्ट मिलता है जाने पर उसको पार
करने के लिए ये केवल गौ माता ही सहायक हैं अन्यथा दूसरा कोई नहीं तो शारीरिक रोग हो या मानसिक रोग हो गौशाला में कुछ देर समय बिताने से स्वास्थ्य में बहुत लाभ मिलता है इसमें कोई संसाय नहीं है जय मैन विंध्यवासिनी और चलिए अब बात करेंगे गौ सेवा की गौ सेवा कैसे हमारे जीवन से दुर्भाग्य को दूर कर सकती है और सौभाग्य को बढ़ा सकती है यही
बता रहे हैं आपको पंडित जी आजकल चक्र में और पंडित जी से जानेंगे की कैसे हम गौ सेवा करके अपने भाग्य को और दुरुस्त कर सकते हैं एक ऐसा क्या उपक्रम है जिससे हम सारी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं वह इस
सृष्टि में गे है जो नव ग्रहों के दोष को दूर कर सकते हैं कैसे अगर आपके जन्म कुंडली में तुला राशि का सूर्य है या मकर कुंभ राशि में सूर्य पीड़ित होकर के पड़ा हुआ है और उसका अशुभ प्रभाव आपको मिल रहा है तो उसे भैया आप सुख कैसे बनाएंगे यह मैं आपको बताना चाहता हूं और वह भी गे की सेवा से
तो ज्योतिषी दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो एकमात्र गे ही ऐसा प्राणी है जिसके जरिए सभी ग्रहों के ज्योतिषी उपचार किए जा सकते हैं सूर्य ग्रह के लिए गौ माता के ज्योतिषी उपाय क्या है ये जान लीजिए यदि आपका सूर्य निर्बल है दो पक ग्रहों के मध्य में है
paapagraha सूर्य राहु की दृष्टि में है यदि ऐसी स्थिति में या नीचे के navanshak में है तो ऐसे में अगर सूर्य सुवा स्थिति में है तो आप नियमित रूप से गे को सबूत गेहूं उबाल करके उसमें थोड़ा सा गुड डालकर के गे को ठंडा होने पर खिलाए
इससे आपका तेज और प्रभुत्व का विस्तार होगा आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और सूर्य का नकारात्मक प्रभाव आपके ऊपर से दूर होगा क्या करेंगे गेहूं को धोकर के उसको अच्छे से उबालकर के पका करके उसमें गुल दल करके और वो गे माता को ठंडा होने के बाद खिलाना है
तो चाहे जितना कमजोर सूर्य होगा उसमें के भी प्रभाव में वृद्धि आएगी रविवार को गे को गेहूं और गुड मिलाकर के खिलाने से कुंडली में कमजोर सूर्य के प्रभाव कम होने लगते हैं और बचा के साथ गे का डैन करने से भी सूर्य को बाल मिलता है जय मैन विंध्यवासिनी
लोगों की कुंडली में चंद्रमा कब्जा से जुड़ा कौन सा उपाय करना चाहिए लिए जानते हैं बताइए पंडित जी जन्म कुंडली में चंद्रमा जब जिसका कमजोर होता है उसे व्यक्ति को माता का सुख नहीं होता है उसे व्यक्ति का मैन कमजोर होता है उसको ठीक से नींद नहीं आती है मानसिक
बीमारियां रहती हैं हीमोग्लोबिन कम हो जाता है साइनस और अस्थमा का अटैक बढ़ जाता है यह सारी बुराइयां चंद्रमा देता है तो ऐसे लोगों को रात को सोते समय गुनगुना गे का दूध पी लेना चाहिए और अगर हो सके तो उसमें केसर दल करके अगर पिया जाए तो सोने पे सुहाग का कम करेगा
सुबह खाली पेट गे के दूध से बड़ा मक्खन खा सकते हैं इससे भी आपके शरीर में कैल्सियम की आपूर्ति होगी राहु और शनि जैसे ग्रहों के कारण ची हुआ चंद्रमा आशु फल नहीं देगा या चंद्रमा के आगे पीछे अगर पापा ग्रह हैं तो भी इसका पापा प्रभाव आपके ऊपर नहीं पड़ेगा जय मैन विंध्यवासिनी
कुंडली में मंगल कमजोर है तो मंगलवार को गे को क्या खिलाना चाहिए लिए जानते हैं बताइए पंडित जी मंगलवार को गे को क्या खिलाना चाहिए अगर मंगल कमजोर होगा आपके कुंडली में तो पहली बात तो भाई बहनों का सुख नहीं होगा दूसरी बात भाई के दुश्मन रहेंगे तीसरी बात आप डरपोक होंगे चौथी बात आपके अंदर कायरता रहेगी आप हिम्मत और साहस के साथ बातचीत नहीं कर पाएंगे मंगल अगर
आपका कमजोर होगा तो आग और बिजली से बार-बार आपको परेशानी होगी मंगल कमजोर होगा तो कर्ज लेने के बाद आपको भी कर्ज नहीं उतार पाएंगे तो यह सारे लक्षण अगर आपके शरीर में या आपके जीवन में मिलते हैं जो मैं बता रहा हूं तो आप भी maniyega की आपका मंगल कमजोर है और हान मंगल अगर कमजोर होगा तो वैवाहिक जीवन में टूटन और बिखराव होगा
तो मंगल अगर कमजोर है तो मंगलवार को मशहूर की डाल पीसकर देसी घी में रोटी पीकर गे को खिलाना चाहिए जिन लोगों की कुंडली में मंगल बारहवें भाव में हो तो मांगलिक दोष होता है ना ऐसे लोगों को रात में अचानक चौक कर या दर कर उठ जाने की बीमारी भी होती है ऐसे लोगों
को हर रोज सुबह गौ माता की परिक्रमा करनी चाहिए गे का स्पर्श करने से गे के नथुने का जो हवा निकलती है सिर्फ वो हवा लग जाने से सैकड़ो रोग दूर हो जाते हैं हम जब घर पर रहते द और कभी किसी के मूल शांति का मौका मिलता था मूल शांति करने जाते द तो वहां मूल शांति में मंत्र चाहे