Mystic Rumi · Transcript · · Updated
Masnavi Explained | Timeless Sufi Wisdom of Rumi | Episode 10 – Transcript
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Summary
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- हकीम ने कनीज का हाथ थामकर अलग-अलग शहरों और गलियों का जिक्र किया, और समरकंद का नाम आते ही कनीज की नब्स और चेहरे की रंगत बदल गई।
- वजीर ने बादशाह को बताया कि इंसान जितने भी जहाज चलाता है उनमें दौलत की ख्वाहिश, शोहरत की तमन्ना या जिंसी ख्वाहिश ही होती है।
- रूहानी बेदारी के मुसाफिक को अपनी यह तलब जमाने से छुपानी चाहिए क्योंकि जिस चीज को लफ्जों में बयान किया जाता है वह दुनिया की चीज बन जाती है।

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Transcript
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[संगीत] उसने एकएक शहर और एकएक गली का जिक्र किया मगर कनीज की रग ना फड़की ना चेहरा जर्द पड़ा उसकी नब्स अपनी जगह पर रही और फिर शकर जैसे शहर समर कंद का जिक्र आया तो उसकी नब्स गोया जाग उठी चेहरा लाल पीला हो
गया कि समर कंदी सुनार उससे बिछड़ गया था बीब ने जब मरीजा का यह राज पा लिया तो गोया उसे उसके दर्दो मुसीबत की जड़ मिल गई तबीब ने उसकी गली कूचे का पूछा बताया कि वह तफर के इलाके सर पल का है तबीब बोला
मैं तेरा मर्ज समझ गया अब तू मेरे इलाज का जादू देख खुश मुतमइन और काने रह के मैं अब वो करूंगा जो बारिश चमन के साथ करती है अब मैं तेरा गम ख्वार हूं इसलिए तू कोई गम ना कर मैं तुम पर 100 बापों से ज्यादा मेहरबान हूं खबरदार खबरदार यह राज किसी से
ना कहना चाहे बादशाह भी तुझसे पूछे ना बताना गर तेरा राज तेरे दिल में छुपा रहा तो तेरी मुराद जल्द पूरी हो जाएगी हजूर ने फरमाया कि जिसने अपना राज छुपा लिया बहुत जल्द उसकी मुराद बराई याद रख के दाना खुद को जमीन के अंदर छुपा लेता है फिर ही कहीं
जाकर बाग को सर सब्ज करता है सोना और चांदी गर छुपे ना होते तो लोग उन्हें कानों में ढूंढने ना जाते तबीब की मेहरबानी और वादों ने मरीजा के खौफ को काफी कम कर दिया सच्चे वादे दिलपजीर होते हैं जबकि झूठे वादे परेशान कुन अहले कर्म
का का वादा तो रवा खजीना है और ना अहल का वादा मुसलसल अजाब हकीम ने बादशाह की महबूबा का हाथ अपने हाथ में थाम लिया और उससे उन तमाम जगहों की बात करता रहा जहां जहां वह कनीज रही थी जहां-जहां कनीज रह चुकी थी उस शहर के हर हर कूचे और गली का हकीम ने जिक्र
किया मगर कनीज की ना तो रग में जुंबिश हुई ना ही उसके चेहरे का रंग बदला के जो हकीम को पता देता कि इस कनीज का दिल किस शहर के किस कूचे के किस घर में अटका है इस बात को समझे कि हर इंसान का एक मरकज होता है कोई एक मेन मोटिवेशन होती है जो उसे मेवे हरकत रखती है जो उसकी ख्वाहिशों को जवान रखती
है जो उसे अपना असीर रखती है कोई इंसान दौलत के पीछे दीवाना होता है कोई शोहरत का कैदी होता है कोई जिन से मुखालिफ का असीर इंसान की रूह जब भी उसकी आंखों से ओझल होती है तो उसकी वजह यही धुंद होती है जो यह तीन ख्वाहिशें उड़ाती हैं कहते हैं कि पुराने दौर के चीन में एक बादशाह रहता था
वह एक दिन अपने एक दाना वजीर के साथ अपने मुल्क की बड़ी मसरूफ बंदरगाह के दौरे पर गया सामने समंदर में कई जहाज थे जो आ जा रहे थे उसने अपने वजीर से पूछा तुम्हारे ख्याल में कितने जहाज हैं जो आज आ रहे हैं वजीर ने कहा बादशाह सलामत मुझे तो तीन ही जहाज नजर आ रहे हैं बादशाह बड़ा हैरान हुआ उसने कहा इतने ज्यादा जहाज हैं तुम्हें
सिर्फ तीन नजर आते हैं वजीर ने जवाब दिया हजूर आपको जितने भी जहाज चाहे नजर आ रहे हो मगर हकीकत यह है कि इंसान जितने भी जहाज चलाता है उनमें तीन ही चीजें होती हैं यह दौलत की ख्वाहिश यह शोहरत की तमन्ना या जिंसी ख्वाहिश और आप अगर मॉडर्न साइकोलॉजी को जा मानते हैं तो वह भी यही
कहती है कि यह तीन इंसान की बुनियादी मोटिवेशंस हैं जो उसे मुतहर रखती हैं तो हकीम का हाथ मरीजा की नब्ज पर था और नजर उसके चेहरे पर और वह उसे एक एक शहर एक एक गली का नाम लेकर पूछता रहा इंसान की अना उसकी दिमाग की यह फितरत है कि जहां उसका फोकस है उसके जिक्र पर उसके देखने सुनने
सूंघने चखने पर उसके की रगों में दौड़ते खून में तगुर आ जाता है उसकी साइकोलॉजी बदल जाती है उसकी फिजियोलॉजी बदल जाती है चेहरे का रंग बदल जाता है बात करने का ढंग बदल जाता है कभी आपने गौर किया कि आप किसी महफिल में ऐसे ही बोर बैठे हो और कोई किसी ऐसे शख्स का नाम ले ले जिससे आपको नफरत हो या मोहब्बत हो तो कैसे आपके पूरे जहनी और
जिस्मानी ढांचे में तगर आ जाता है किसी जगह आप बैठे हूं और बोर हो रहे हूं और अचानक आपकी दिलचस्पी का मौजू छिड़ जाए तो कैसे आपकी बोरियत दिलचस्पी में ढल जाती है अनाहा के काम करने का यही ढंग है इसकी जहां तवज्जो गड़ जाए वहां से साइकोलॉजी और फिजियोलॉजी जुड़ जाती है इस किस्से में तबीब जो कि मुर्शिद रूमी शाह शंस तबरेज का
इस्तरा है वो मरीजा के साथ मतलब इंसानी अना के साथ यही कुछ कर रहा है उसने मरीजा की नब्स को पकड़ रखा है और नजरें उसके चेहरे पर गाड़ रखी हैं और हर उस शहर कूचे गली और घर का जिक्र करता जा रहा है जिससे उस कनीज का यानी इंसानी अना का ताल्लुक है मकसद यह है कि जब भी उस घर का कूचे का
जिक्र आएगा जिससे वह कनीज जुड़ी थी तो उसकी रगों में खून का बहाव भी तेज होगा और चेहरे की रंगत भी बदलेगी एक बात को समझे कि जो गुरु होता है जो मुर्शिद होता है वह आपकी रूह तक त कोई रसाई नहीं रखता क्योंकि रूह कोई मेनिफेस्टेड चीज है ही नहीं रूह कहीं मौजूद कोई ऐसी चीज नहीं कि जिसकी तरफ
इशारा हो सके जिसको छुआ देखा सुना सूंघ चखा जा सके रूह हवा से खमसा की दुनिया का हिस्सा ही नहीं कुरान कहता है वह आकर पूछते हैं कि रूह क्या है तो नबी उन्हें बता दीजिए कि यह अमरे रब्बी है यह खुदा का हुक्म है है मुर्शिद क्या करता है कि मुर्शिद बस उस धुंद को हटा देता है जिसने
रूह को लपेट रखा होता है जब यह धुंद हट जाती है तो फिर आप अपनी रूह को देख सकते हैं देखने का मतलब यह नहीं कि आंख से देख सकते हैं देखने का मतलब यह है कि आप बस रूह ही रह जाते हैं अना अनाई दिमाग व धुंद है जिसने रूह को लपेट रखा है जब धुंद छट जाती है तो जो बच रहता है वो रियल आप होते
हैं इसको इस मिसाल से समझे कि जब बीमारी हट जाती है तो बस सिहत रह जाती है अब सिहत के बारे में कहीं नहीं बताया जाता कि वह वहां है या यहां है उसका होना बस होना होता है बताया तो सिर्फ बीमारी के बारे में जा सकता है सर में दर्द है गुर्दे में दर्द है जिगर खराब है पैर में कांटा है यह सब चीजें आप बता सकते हैं मगर जब आप
मुकम्मल तौर पर सिहत मंद हो तो फिर नहीं बताया जाता कि सिहत कहां है उसका होना बस उसके होने से ही साबित होता है मुर्शिद भी यही करता है वह बीमारी की तस्स करता है और बीमारी को हटा देता है और इंसान की असल बीमारी बस एक है उसकी अना मुर्शिद अना की सबसे बड़ी मोटिवेशन सबसे बड़ी बीमारी का
पता लगाता है और उसका इलाज करता है इसलिए मुर्शिद के हवाले से गुरु के हवाले से एक बात को याद रखें कि वो आपकी रूह को कुछ नहीं करता बस आपकी अना की बीमारियों का इलाज करता है बीमारी हटा देता है क्योंकि बीमारी ना रहे तो बाकी जो बच रहता है उसे सिहत कहते हैं इसलिए इस बात को समझ लेना बहुत जरूरी है कि हकीकी मुर्शिद बिल्कुल
डॉक्टर की तरह काम करता है इसीलिए मौलाना रूमी ने अपने मुर्शिद शाह शम्स तबरेज को इस किस्से में बतौर एक दाना हकीम तबीब तारे के तौर पर इस्तेमाल किया है किस्सा आगे बताता है कि तबीब कनीज का हाथ थामे आंख चेहरे पर गाड़े उससे मुख्तलिफ शहरों कूचू और घरों के बारे में पूछता रहा लेकिन
मरीजा की ना तो नब्स तेज हुई ना चेहरे का रंग बदला और फिर जिक्र आया समरकंद का कि जिसके एक सुनार से इस कनीज को इश्क था जब समरकंद का जिक्र आया तो मरीजा की रगों में दौड़ रहे खून की गर्दिश तेज हो गई चेहरे का रंग पहले जर्द पड़ा और फिर सुर्ख हो गया जहां दीदा तबीब फौरन समझ गया कि इस
खातून की असल बीमारी क्या है इस अलामत में इंसानी अना की सबसे बड़ी लालच की तरफ भी एक लतीफ इशारा है कि इसमें जरगर को इस्तेमाल करके बताया गया है कि इंसानों की अजीम अक्सर की सबसे बड़ी मोटिवेशन रूह को धुंद आलू करने वाली सबसे बड़ी चीज का नाम है जर
आज के इंसान को भी अगर गौर से देखें तो उसकी सबसे बड़ी जिंदगी की मोटिवेशन दौलत है जहां दौलत के मिलने की तवको बनती है जहां मुलाज मीन की तनख्वाह बढ़ने की बात आती है जहां नई फैक्ट्री खड़ी होने का जिक्र आता है जहां किसी बिजनेस के डूबने की बात आती है तो अक्सर इंसानों के खून की
गर्दिश बदल जाती है चेहरे का रंग बदल जाता है तबीब को उस र के जिक्र पर मरीजा की नब्ज में आने वाली तब्दीली और चेहरे की रंगत में आने वाले तगुर से उसकी असल बीमारी का पता चल गया उसे मालूम हो गया कि इस औरत की असल मुसीबत इसका हकीकी दर्द क्या है वह समरकंद के इलाके गत फर के उस
सुनार के इश्क की मुब्तला थी और उसकी जुदाई ने उसे इस शदीद मर्ज का मुब्तला बना रखा था तबीब ने जब मरीजा कासल मर्ज मालूम कर लिया तो उसे कहा कि मैं तेरा मर्ज समझ गया अब तू मेरी मसीहाई का जादू देखेगी याद रखें मर्ज की तश्फीन के इलाज का सबसे पहला
और अहम तरीन कदम होता है अना की असीर यह दुनिया और इसका असल मसला बस एक है कि यहां मर्ज की तशिला इलाज किए जाते हैं इंसान समझता है कि उसकी बीमारी कमजोरी है और अगर ताकत मिल जाए तो उसके सारे मसले हल हो जाएंगे मगर इंसान यह सोचने के लिए तैयार ही नहीं होता कि असल मसला अना की वह
ख्वाहिश है जो ज्यादा दौलत ज्यादा शोहरत में अपनी ताकत देखती है यह मर्ज की गलत तश्च का इलाज भी नहीं हो पाता इंसान दौलत को पाने के पीछे जाता है कि दौलत ताकत है जो उसकी कमजोरी को दूर कर देगी इंसान शोहरत के पीछे भागता है कि शोहरत मिल गई तो गोया उसे ताकत मिल गई जो की कमजोरी को
खत्म कर देगी मगर असल बीमारी अना की ख्वाहिश है यह तश्न सान नहीं कर पाता अंजाम यह होता है कि सारी जिंदगी इंसान चीजें जमा करता है उदों रुतबो बैंक बैलेंस के पीछे भागता है मगर आखिर में मालूम यह होता है कि पानी के जिस बर्तन को वह भरने की कोशिश कर रहा था उसका पैदा ही नहीं था
और पैदा ना होने की वजह से वह कभी नहीं भर सकता याद रखें ख्वाहिश के बर्तन का कोई पैदा नहीं होता तुम कानून का खजाना भी पा लो तो भी तुम खुद को भरे हुए ना पा सकोगे और मौत के वक्त सिकंदर की तरह तुम भी पाओगे कि हाथ अब भी खाली हैं तमाम उम्र की दौड़ धूप रियाजत का समर एक पछतावे का