JAIIB CAIIB Wallah · Transcript · · Updated
JAIIB Nov 2026 | IF & IFS One Shot Revision 🔥 | Part 1 | Complete Exam Preparation | by Ashish Sir – Transcript
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Summary
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- आरंभ सीरीज नवंबर 2026 की जेएआईबी और डीबीएफ परीक्षा को लक्षित करते हुए शुरू की गई है।
- विश्व बैंक की आय के आधार पर वर्गीकरण में भारतीय अर्थव्यवस्था को लोअर मिडिल इनकम इकॉनमी के अंतर्गत रखा गया है।
- यूनियन बजट को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लेकर सबसे पहले लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।

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Transcript
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गुड इवनिंग। गुड इवनिंग ऑल ऑफ यू। स्वागत है आप सभी मित्रों का आज के इस मुलाकात में। आज से शुरू होने वाले इस सेशन में। गुड इवनिंग। सभी मित्र आ जाए भैया। आज से आपके लिए इस हमारे ऑफिशियल YouTube चैनल पर अगली साइकिल यानी जो आपकी नवंबर 2026 की जे एआईबी की साइकिल है उसके लिए क्लासेस शुरू हो रही हैं। आरंभ फाउंडेशन सीरीज की शुरुआत की जा रही है। मेरा नाम आशीष पाठक है। मैं आपके साथ बातचीत करूंगा आपके पहले पेपर के लिए और पहला पेपर है इंडियन इकॉनमी इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम।
इस विषय पर मेरी आपसे बातचीत होने वाली है। थोड़ी चर्चा मैं इस सीरीज के बारे में आपसे कर लूं। ये सीरीज क्या है? क्लासेस कैसे चलने वाली हैं? कब-कब आपकी क्लासेस चलने वाली हैं? इन पर मैं पूरी चर्चा करूंगा। आप में से जितने भी मित्र हैं जो टारगेट कर रहे हैं इस बार नवंबर 2026 के जेएआईबी या डीबीएफ को आप सभी के लिए है। बहुत इत्मीनान से पूरी क्लासेस को सुनते चलिएगा। चीजें आप तक जो पहुंचाई जा रही है, वह आपके आपका जो एग्जामिनेशन उसको टारगेट करते हुए यह पूरी क्लास डिजाइन की गई है। शुरू करते हैं आज की बातचीत। आप
में से बहुत सारे मित्र हैं भैया जो पूर्व परिचित होंगे जिनसे जिन्होंने क्लासेस की होंगी कहीं ना कहीं और बहुत सारे हमारे नए मित्र हैं। तो इंडियन इकॉनमी इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम पर मेरी आपसे बातचीत होगी इस आराम सीरीज में। पहले मैं सीरीज के विषय में आपको बता दूं ताकि आपको ये क्लियर हो जाए कि कब-कब आपकी क्लासेस चलने वाली हैं। इसमें क्या हम डिस्कस करने वाले हैं। ये सारी चीजें आपको पता चल जाएंगी। ठीक है जी इतनी बात? ये सारी चीजें आपको पता चल जाएंगी। देखिए आरंभ सीरीज शुरू किया गया है आपके नवंबर एग्जामिनेशन को टारगेट करते हुए। क्या होगा इस सीरीज में?
ये एक फाउंडेशन बैच की तरह है। एक फाउंडेशन सीरीज की तरह है। फाउंडेशन सीरीज का मतलब ये है कि हर एक सब्जेक्ट के लिए आपकी ये सीरीज शुरू हो रही है। तो इंडियन इकॉनमी इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम मैं डील कर रहा हूं। अरविंद सर पीपीबी पर आरंभ सीरीज शुरू कर चुके हैं। भास्कर सर अपने विषय यानी आरबीडब्ल्यूएम पर आपकी ऐसी ही सीरीज शुरू हो चुकी है। टाइमिंग सबकी अलग-अलग है। मेरी जो क्लास आपके साथ होगी इस पहले पेपर पर मेरी जो मुलाकात होगी वो आपके साथ होगी ट्यूसडे से संडे। यानी ये जो क्लास आपकी चलने वाली है रेगुलर लाइव चलेगी। ट्यूसडे से संडे मैं आपसे मिलूंगा
शाम को 7:00 बजे से। तो 7 शाम को 7:00 बजे से यानी 7:00 pm से ट्यूसडे टू संडे मैं आपसे मिलूंगा इंडियन इकॉनमी इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम पर। बात नंबर एक बात नंबर दो क्या करेगा ये सीरीज? कैसे इस पे बातचीत होने वाली है? तो आपके पूरे पेपर में ये जो इंडियन इकॉनमी इंडियन फाइनल सिस्टम का जो पहला पेपर है इसमें आपकी 45 यूनिट है। जो चार मॉड्यूल में है। तो चार मॉड्यूल की 45 यूनिट में जो भी इंपॉर्टेंट टॉपिक हैं उन पर मैं एक-एक करके पूरी बातचीत आपसे करने वाला हूं। इस सीरीज के पीछे क्या कारण रहे हैं? शुरू करने के
पीछे क्या रीज़न रहे? तो अभी हाल फिलहाल हाल फिलहाल में 2025 में भी 2026 में भी जितने एग्जामिनेशन हुए हैं जेआईबी के तीन एग्जामिनेशन में अगर हम पीछे वाले तीन एग्जामिनेशन की बात करें तो ज्यादातर जो क्वेश्चन थे वो कॉनसेप्चुअल थे। तो अगर आपका कांसेप्ट नहीं तैयार है। अगर आपने ठीक से सब्जेक्ट को नहीं पढ़ा है तो एक बार में सारे पेपर क्लियर करना आपके लिए बहुत मुश्किल होने वाला है। क्योंकि अब क्वेश्चंस लें्थी बनाए जा रहे हैं। कॉन्सेप्चुअल क्वेश्चंस बन रहे हैं। यही रीज़न है कि हमने इस सीरीज को शुरू किया
ताकि हम आपके कांसेप्ट को आपके पेपर के पहले डिस्कस कर लें। आपके पेपर के काफी पहले हम आपके कांसेप्ट को पूरा डिस्कस कर लें। पूरा सिलेबस आपके साथ डिस्कस कर लें ताकि आपकी कंप्लीट थ्योरी हो जाए ताकि आपका जो कांसेप्ट है वो बिल्कुल क्लियर हो जाए। बहुत आराम से कहीं से भी क्वेश्चन बने आप आराम से इस जो है कांसेप्ट के माध्यम से अपने एग्जाम में को क्लियर कर सकें। वहां पर क्वेश्चंस ईज़ली कर सकें। तो कुल मिला के अगर मैं एक लाइन में बात करूं तो ये जो आरंभ सीरीज है जेआईबी और डीबीएफ
के लिए ये आपके पूरे सिलेबस को सारे इंपॉर्टेंट टॉपिक को थ्योरी बेस्ड जो है क्लासेस ये चलने वाली थ्योरी के थ्रू कांसेप्ट के थ्रू ये सारी क्लासेस आपकी चलने वाली हैं। हम कांसेप्ट को कवर करने वाले हैं जो आपके एग्जामिनेशन के लिए बेहद जरूरी है। आज हम क्या बातचीत करेंगे? आज हमारी जो बातचीत होगी देखिए बिल्कुल अब मैं आपको बता दूं ये क्लास कैसे शुरू हो रही है? बिल्कुल शुरू से हम शुरू कर रहे हैं। आप में से मैं मान के चलूं बहुत सारे ऐसे हमारे कैंडिडेट हैं बैंकर्स हैं जो ये पेपर शायद पहली बार देने जा रहे हैं। है
ना? जेआईबी पहली बार देने जा रहे हैं या डीबीएफ पहली बार देने जा रहे हैं। उनके लिए आज जो हमारी बातचीत होगी वो सिलेबस डिस्कशन पर होने वाली है। ठीक है? सबसे पहले हम सिलेबस को ही देख लें कि आपका इंडियन इकॉनमी, इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम का सिलेबस क्या है? कहां-कहां से क्वेश्चंस पूछे जाते हैं। उन पर हमारी आज बातचीत होगी और नेक्स्ट मुलाकात से हम आपके टॉपिक पर चर्चा शुरू कर देंगे। मैं फिर से आपको बता दूं ये सीरीज आपके लिए बेहद इंपॉर्टेंट होने वाली है क्योंकि ये सीरीज में आपका पूरा सिलेबस कवर होगा।
पूरे सिलेबस के सारे इंपॉर्टेंट टॉपिक का कांसेप्ट कवर होगा एक-एक करके। ये सिलेबस आपको कितना इंपॉर्टेंट ये सिलेबस है जब आप अपने पेपर देने बैठेंगे अपने एग्जामिनेशन देने तो आपको पता चलेगा कि इस इस पर्टिकुलर सीरीज से आपका क्या जबरदस्त रिजल्ट निकल के आया है। क्लियर हो गई इतनी बात भैया? दूसरी चीज ये है कि आप में से जो भी डीबीएफ दे रहे हैं। देखिए आपको डीबीएफ और जेआईबी में आप सभी मित्रों को मैं मान के चल रहा हूं कि अंतर पता होगा। जेआईबी और डीपीएफ सेम एग्जामिनेशन होता है। बस दो अलग-अलग कैंडिडेट के लिए इसलिए दो अलग-अलग नाम से होता है। बाकी सेम
सिलेबस है। सेम एग्जाम है। एक ही दिन होता है। दोनों पेपर एक ही साथ आप बैठ के देते हैं। जेआईबी ये एग्जाम उनके लिए है। वो जो बैंकर्स हैं जो आईएबीएफ के मेंबर हैं वो यही एग्जाम जेआईबी के नाम से देते हैं। और जो अभी बैंक में नहीं है यानी जो आईएबीएफ के मेंबर नहीं है जो अभी भी बैंक में नहीं है वो यही एग्जामिनेशन डीबीएफ के नाम से देते हैं। डीबीएफ भी आपके लिए बेहदेंट हो जाता है। अगर आप डीबीएफ क्वालीफाई करके जाते हैं तो आपको बैंक ज्वाइन करने के बाद जीआईवी देने की जरूरत नहीं होती है। आपका यही डीबीएफ का सर्टिफिकेट जीआईबी में
कन्वर्ट हो जाता है और आपको एक इंक्रीमेंट तुरंत मिल जाता है। इसलिए डीबीएफ आप में से जो बैंक में नहीं वो डीबीएफ एग्जाम जरूर दें। अगर आप बैंक में जाना चाहते हैं, बैंक में जा रहे हैं तो आपको फिर जीआई वहां नहीं देना होगा। आप सीधे सीआईबी दे सकते हैं। बाकी बैंकर्स इसको जीआईबी के नाम से देते हैं। अब आते हैं आपके इस पर्टिकुलर पेपर के सिलेबस पर मैं पूरी बातचीत कर लेता हूं। देखिए आपके इस मॉड्यूल इसमें इंडियन इकॉनमी फाइनेंसियल सिस्टम में अगर मैं बात करूं तो कुल चार मॉड्यूल हैं। मॉड्यूल ए, मॉड्यूल बी, मॉड्यूल सी और डी। इन चारों मॉड्यूल में
मैंने मैं पहले कुछ आपको विशेष बात बता दूं ताकि चीजें आपके लिए एकदम से क्लियर है। अगर हम मॉड्यूल की बात करें तो आपको चार मॉड्यूल मिलने वाला है। मॉड्यूल ए, मॉड्यूल बी, मॉड्यूल सी और मॉड्यूल डी। अब ये आपके जो ऊपर वाले दो मॉड्यूल है मॉड्यूल ए और बी इनके जो टॉपिक
हैं ये इंडियन इकॉनमी से रिलेटेड हैं। यानी इसमें जो भी टॉपिक आपको मिलेंगे ये सारे इंडियन इकॉनमी से रिलेटेड हैं। मॉड्यूल सी और डी इसमें जो टॉपिक आपको आपको मिलेंगे वो सारे के सारे टॉपिक हैं आपके इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम के। इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम के। इसीलिए इस पूरे पेपर का नाम बन जाता है इंडियन इकॉनमी एंड इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम। तो चार मॉड्यूल में आपका पूरा सिलेबस डिवाइड है। अब एक-एक करके मॉड्यूल वाइज बातचीत करते चलते हैं।
आपका क्या सिलेबस है इसको देखते चलिएगा। बहुत ध्यान से। मॉड्यूल ए में आपको कुल 11 यूनिट मिलने वाली है। मैं फिर से आपको बता दूं कि जो मॉड्यूल वाइज जितने भी यूनिट हैं वो सारी यूनिट मैं कवर करूंगा। सारी यूनिट के जितने भी इंपॉर्टेंट मामले हैं, जितने भी इंपॉर्टेंट कांसेप्ट्स हैं, उन पर मेरी आपसे पूरी बातें होगी। ये कंप्लीट सीरीज है भैया आपके लिए आरंभ जिसकी शुरुआत हम आज से कर रहे हैं सिलेबस डिस्कशन के साथ। ठीक हो गई जी इतनी बात? सबसे पहले देख लेते हैं। देखिए मॉड्यूल ए का जो टॉपिक है ये इंडियन इकॉनमी का है। यानी
इसमें आपको जितने भी टॉपिक मिलेंगे और ये इंडियन इकॉनमी के ही सारे टॉपिक मिलेंगे। हर एक मॉड्यूल की जो पहली यूनिट है वो एक तरीके से इंट्रोडक्टरी यूनिट है। उस पूरे टॉपिक के बारे में एक तरीके से इंट्रोडक्शन जैसा ही आपको देखने को मिलता है। अब अगर हम इसका एग्जामिनेशन में वेटेज देखें तो इसका वेटेज आराम से 10 से 15% के आसपास वेटेज होता है। मोर और लेस थोड़ा कम ज्यादा भी हो सकता है लेकिन 10 से 15 12 13 14 क्वेश्चन तो मॉड्यूल ए से पूछे जाते हैं और कॉनसेप्चुअल क्वेश्चंस पूछे जाते
हैं। यहां पर जितने भी टॉपिक्स आपको दिखाई दे रहे हैं। एन ओवरव्यू ऑफ़ इंडियन इकॉनमी सेक्टर इसमें बस केवल इंडियन इकॉनमी का ओवरव्यू दिया है। आजादी के पहले क्या कंडीशन थी? उसके बाद में क्या कंडीशन और कुछ इंपॉर्टेंट कांसेप्ट्स हैं। जैसे हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ क्या होता है? इसके अलावा दादा भाई नौरोजी की जो बुक है उसमें जो ड्रेनेज ऑफ वेल्थ की कांसेप्ट है वो बेसिकली क्या है? होम चार्जेस क्या है? और कुछ डाटा दिया गया है। इसके अलावा जब आप यूनिट नंबर दो में आते हैं तो सेक्टर्स ऑफ इंडियन इकॉनमी प्राइमरी सेक्टर, सेकेंडरी सेक्टर, टर्शरी सेक्टर, क्वार्टनरी,
इक्वनरी, ऑर्गेनाइज्ड अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर इन सब की बातचीत है इसमें। तो ये जितने भी आपको टॉपिक दिखाई दे रहे हैं 11 टॉपिक आपको दिखाई देंगे। मॉड्यूल ए बहुत आसान सा मॉड्यूल है। इसमें कोई भी ऐसा टॉपिक नहीं है जिसमें बहुत गहरे कांसेप्ट हैं जिनको समझना बहुत आसान हो। तो इन सारी के सारे यूनिट पर मेरी आपसे बातचीत होगी और सारे यूनिट के जितने इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है वो सब हम कवर करेंगे। इकोनॉमिक प्लानिंग में आप फाइव ईयर प्लानिंग पढ़ते हो। इकोनमिक प्लानिंग क्या होती है? नीति आयोग यहां से भी क्वेश्चन हर साल बनता है। एक क्वेश्चन रोल ऑफ़ प्रायोरिटी सेक्टर। इसमें हम देखते हैं
प्रायोरिटी सेक्टर क्या है? प्रायोरिटी सेक्टर का रोल क्या होता है? प्रायोरिटी सेक्टर के लिए आरबीआई की गाइडलाइंस क्या है? और एमएसएमई इसके लिए क्या कैटेगरी एमएसएमई की कैटेगरी कैसे डिफाइन की गई है? एमएसएमई के लिए सरकार क्या कर रही है? ये सारी चीजें हम देखने को पाते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर इस टॉपिक बहुत छोटे-छोटे टॉपिक हैं। इकोनमी रिफॉर्म थोड़ा सा बड़ा टॉपिक है। इकोनमिक प्लानिंग थोड़ा सा बड़ा टॉपिक है। फॉरेन ट्रेड थोड़ा बड़ा है। बाकी सारे टॉपिक बहुत बड़े-बड़े नहीं छोटे-छोटे आसान से टॉपिक हैं। इसके अलावा हम इस पर्टिकुलर टॉपिक में देखते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर क्या होता है?
इंफ्रास्ट्रक्चर में हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर क्या है? सॉर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर क्या है? सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर क्या होता है? ये सब हम देखते हैं। अभी तक मैंने आपको जितने भी टॉपिक बताए उनमें सेक्टर्स ऑफ इंडियन इकॉनमी, इकोनमिक प्लानिंग, रोल ऑफ प्रायोरिटी सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंक्लूडिंग सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर इन सब में कम से कम एक या दो-दो क्वेश्चन बनाने की ताकत है और सबसे आपके कम से कम एक से दो क्वेश्चन बनते हैं। ठीक हो गई जी इतनी बात? फिर आता है ग्लोबलाइजेशन। ग्लोबलाइजेशन क्या है? ग्लोबलाइजेशन का इंपैक्ट क्या है? रिवर्स ग्लोबलाइजेशन
क्या होता है? इसे हम देखते हैं। नेक्स्ट आपका इकोनमिक रिफॉर्म। ये 1991 का जो इकोनॉमिक रिफॉर्म है, उसकी पूरी चर्चा करता है। क्लियर है? कौन-कौन से सेक्टर में, बैंकिंग सेक्टर में, फाइनेंसियल मार्केट में, मनी मार्केट में, कैपिटल मार्केट में, इंश्योरेंस सेक्टर में क्या रिफॉर्म हुआ है, वहां से क्वेश्चन है। इस टॉपिक से हर बार कम से कम दो क्वेश्चन तो बनते ही बनते हैं। ज्यादातर नरसिमन कमेटी वन और नरसिमन कमेटी टू से क्वेश्चन बनता है। ठीक है? इंफ्रास्ट्रक्चर से एक क्वेश्चन आपके बनने की पॉसिबिलिटी रहती है। यहां से दो क्वेश्चन बनने की पॉसिबिलिटी होती है। यहां से दो क्वेश्चन
यहां से दो क्वेश्चन बनने की पॉसिबिलिटी होती है। दो तो बनते ही बनते हैं। ग्लोबलाइजेशन से अमूमन बहुत ज्यादा क्वेश्चन नहीं पूछा जाता है। वरना पहले वाले टॉपिक से लेकिन एक क्वेश्चन बनाने की इनमें भी पूरी कैपेसिटी होती है। फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में फॉरेन ट्रेड पॉलिसी है क्या? एफडीआई क्या है? एफपीआई क्या है?
एफडीआई कौन-कौन से सेगमेंट में कि कौन से सेक्टर में क्या लिमिट है? यहां से भी कम से कम दो क्वेश्चन आपके बन जाते हैं। आराम से दो क्वेश्चन बन जाते हैं। इंटरनेशनल इकोनॉमिक ऑर्गेनाइजेशन यहां से अमूमन या तो एक या तो दो क्वेश्चन बनते हैं। मेनली तीन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन हम पढ़ते हैं इकोनॉमिक ऑर्गेनाइजेशन आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और डब्ल्यूटीओ। फिर क्लाइमेट चेंज, सस्टेनेबल डेवलपमेंट। इससे आपका एक क्वेश्चन बनता है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट क्या है? सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल जो 17 गोल है वो क्या है? क्लाइमेट चेंज क्या होता है? उसका इंपैक्ट क्या होता है?
लास्ट टॉपिक है इशूज़ फेसिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी। यहां से अमूमन क्वेश्चन एक ही बनता है या नहीं बनता है। तो इशूज़ फेसिंग ऑफ़ इंडियन इकॉनमी में बेसिकली इंडियन इकॉनमी क्या इशू फेस कर रहा है? जैसे पावर्टी क्या है? पावर्टी एलिवेशन, माइग्रेशन ये सारी चीजें आपको यहां पर देखने को मिलती है। तो आराम से 10 से 15% का वेटेज ये बनाता है। और इस सारी यूनिट पर जितने भी इंपॉर्टेंट कांसेप्ट हैं, सभी यूनिट पर मैं आपसे बातचीत करने वाला। इस सीरीज का नाम ही इसीलिए आरंभ रखा गया है ताकि आप आरंभ से बिल्कुल तैयारी कर सकें।
अब आता है आपका मॉड्यूल बी। मॉड्यूल बी भी जो आपका है इसमें जितने टॉपिक आपको देखने को मिलेंगे ये सब आपके इंडियन इकोनॉमी के ही टॉपिक आपको देखने को मिलेंगे। ठीक है? लेकिन मॉड्यूल बी मॉड्यूल ए की तुलना में काफी कठिन है। अगर आपका कॉमर्स का, बीकॉम का, इकोनमी का बैकग्राउंड नहीं है, तो ये थोड़ा सा मामला कठिन हो सकता है। इस पर भी मैं हर एक यूनिट पर आपसे विधिवत बातचीत करने वाला हूं। इसका वेटेज थोड़ा सा ज्यादा होता है। इसका वेटेज हम कह सकते हैं 15 से 20% के आसपास मोर और लेस इसका
वेटेज आपका होता है। होता है आराम से 15 20 क्वेश्चन यहां से पूछे जाते हैं। अब इसमें हर एक टॉपिक से कम से कम दो-दो क्वेश्चन बनेंगे। इसमें ऐसा कोई टॉपिक नहीं है जिसमें एक क्वेश्चन बनाने की क्षमता हो। सबसे कम से कम दो कभी तीन और ज्यादा तो चार पांच भी बन सकते हैं। फंडामेंटल ऑफ इकोनॉमिक्स में अब माइक्रोइकोनॉमिक्स का क्या है?
मैकोनॉमिक्स क्या है? इकोनॉमिक्स की कुछ अर्थशास्त्रियों की डेफिनेशन दी गई है। ये आपको देखना है। फिर टाइप्स ऑफ इकोनॉमीज़ में मार्केट इकॉनमी किसको कहते हैं? कैपिटलिस्टिक, सोशलिस्टिक, मिक्स्ड इकॉनमी ये सब आपको देखने को मिलेगा। सप्लाई एंड डिमांड में सप्लाई सप्लाई का जो सप्लाई है, सप्लाई कर्व है, लॉ ऑफ़ सप्लाई है, सप्लाई लॉ ऑफ़ सप्लाई का एक्सेप्शनंस है। मूवमेंट अलोंग विद द कर्व मूवमेंट जो है चेंज ऑफ सप्लाई कर्व ये सब हम देखते हैं। यही सारी चीजें हम डिमांड के लिए देखते हैं। साथ ही साथ इस टॉपिक में अब
यूटिलिटी, मार्जिनल यूटिलिटी, डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी ये सारी चीजें आप पढ़ते हैं। मनी सप्लाई में हम देखते हैं। अब इन सब से भैया यहां से भी आपके दो क्वेश्चन आराम से बन सकते हैं। यहां से भी आपके दो क्वेश्चन बन सकते हैं। यहां पर कुल आपको आठ यूनिट देखने को मिलती है मॉड्यूल बी में। लेकिन सारी कॉनंसेप्चुअल और अच्छी यूनिट है। मजेदार यूनिट है। थोड़ी कठिन भी है एक ही तुलना में। मनी सप्लाई क्या है?
मनी सप्लाई वाले टॉपिक में हम पढ़ते हैं। मनी सप्लाई के साथ-साथ मल्टीप्लायर क्या होता है? वेलोसिटी ऑफ़ मनी क्या है? मेज़रमेंट कैसे किया जाता है? इनफ्लेशन क्या है? इनफ्लेशन के कारण क्या है? इनफ्लेशन को कंट्रोल कैसे किया जाता है? यह सब आप देखते हैं। थ्योरी ऑफ़ इंटरेस्ट आपके पूरे सिलेबस का थोड़ा सा बड़ा भी टॉपिक है और टफ़ टॉपिक है। 2023 में यहां से एक भी क्वेश्चन नहीं बना लेकिन 2024, 2025 एक-एक क्वेश्चन हर साल यहां से बन रहा है। तो यहां से एक या दो क्वेश्चन बनेगा। बिज़नेस साइकिल क्या है? बिज़नेस साइकिल के
कितने फेजेस हैं? कैरेक्टरिस्टिक्स क्या है? ये हम इसमें देखेंगे। बिज़नेस साइकिल भी कम से कम एक से दो क्वेश्चन बनाता है। छोटा टॉपिक है, आसान टॉपिक है लेकिन बेहद इंपॉर्टेंट। देखिए मॉड्यूल बी के सारे टॉपिक इंपॉर्टेंट है। ऐसा कोई नहीं कहा जा सकता कि कोई टॉपिक इंपॉर्टेंट है। मॉड्यूल ए में आपने लास्ट का टॉपिक पहला टॉपिक ग्लोबलाइजेशन वाला ये टॉपिक उतने इंपॉर्टेंट नहीं पूछा जाता बहुत ज्यादा। लेकिन यहां पर ऐसा कोई टॉपिक नहीं है। मॉनिटरी पॉलिसी अगेन बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक यहां से तो तीन-चार क्वेश्चन बन सकते हैं। मॉनिटरी पॉलिसी के सारे टूल इसमें हम पढ़ते हैं। रेपो रेट से लेके