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JTET 2026 | खोरठा | साहित्यकार महामैराथन | संपूर्ण THEORY + TOP MCQ | Nakul Sir LIVE 12:30 PM #jtet – Transcript
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Summary
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- श्रीनिवास पानुरी जी का जन्म 25 दिसंबर 1920 ईस्वी को बरवा अड्डा, धनबाद में हुआ था।
- डॉक्टर ए. के. झा जी का जन्म 20 जून 1939 को चंडीपुर, बोकारो में हुआ था।
- विश्वनाथ दसौंधी 'राज' जी का जन्म 15 अप्रैल 1943 ईस्वी को कतरास के भटमुरना में हुआ था।

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Transcript
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हेलो एवरीवन, मैं नकुल मेहता फिर से एक बार आपके अपने YouTube चैनल एग्जाम योद्धा में स्वागत करता हूं। आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे और जबरदस्त तरीका से अपनी तैयारी में लगे होंगे। तो बताइए भाई आप सभी कैसे हैं? सब कुछ शानदार जबरदस्त तरीका से तैयारी चल रहा है कि नहीं चल रहा है। जल्दी-जल्दी आप सभी जुड़ेंगे। आप सभी को गुड आफ्टरनून, गुड आफ्टरनून, गुड आफ्टरनून और जोहार है ना? तो आज आप लोग जान ही रहे हैं कि सर अपना आज ताबड़तोड़
सीरीज होने वाला है। आज आपका महा मैराथन क्लास है और यह महा मैराथन जो है कंटेंट के हिसाब से तो है ही मेरे भाई समय के हिसाब से भी है। यानी क्लास लंबा चलेगा लेकिन धुआंधार जबरदस्त तरीका से चलेगा। इस क्लास से आपके एग्जामिनेशन में उम्मीद है कम से कम पांच प्रश्न तो बनेगा ही बनेगा। यानी पांच सवाल जेटेट एग्जाम के लिए कंफर्म है। आगामी कोई भी एग्जाम हो जाए
झारखंड में उन सभी एग्जाम के लिए क्लास वेरी इंपॉर्टेंट होने वाला है। लेकिन जेटेट एग्जाम आपके सर पे ऊपर है और आप चाहते हैं कि सर हमें जो है क्या करना है? जेटेट में खोठा में कम से कम 30 में 30 लाना है। हमें 29 भी मंजूर नहीं है। तो फिर यह क्लास आपके लिए है। उन सभी साथियों तक शेयर कर दीजिए। है ना? जिन्हें इस क्लास की आवश्यकता है। देखिएगा हम क्या स्टार्ट करने वाले हैं। तो आप कहेंगे सर
जेटेट खोठा यह हमारा संपूर्ण साहित्यकार का महा मैराथन वन शॉट एक शॉर्ट में खत्म करेंगे। बिल्कुल सभी बातों को समझते हुए। ठीक है? देखिएगा कुछ बातें महत्वपूर्ण है कि ये आपका सिलेबस है वन टू फाइव का। है ना? 1 मिनट में ये सब बात बता के आगे बढ़ जाएंगे सीधे प्रश्न के ऊपर। ये वन टू फाइव का सिलेबस है। पूरा टॉपिक बाय टॉपिक हर एक टॉपिक को हम करवा दिए हैं। आप जाकर के देख सकते हैं। ठीक है? एक टॉपिक बचा हुआ था
आपका साहित्यकार परिचय का जिसका क्लास अभी हम ले रहे हैं। ठीक है? हर एक टॉपिक करवा चुके हैं। साथ ही साथ यह आपका सिक्स टू एट का सिलेबस है। इसमें भी हर एक टॉपिक को करवा चुके हैं। बस ये प्रमुख साहित्यकार बचा हुआ था जिसका क्लास अभी होने वाला है। कहेंगे सर कहां पे देखना है क्लास? तो आपको जेटेट में पूरा नंबर लाने के लिए आपको यह 2000 वाला महा मैराथन सीरीज देखना है। इसमें आठ क्लास होगा दो-दो तीन-ती
घंटे का। टॉपिक वाइज खोट यह देखेंगे वन टू फाइव वाले और अगर ग्रामर में नंबर कम आ रहा है मेरे भाई तो यह आप देख लीजिएगा साथ ही साथ सीडीपी में नंबर कम आता है तो उसके लिए यह प्लेलिस्ट आपका बना हुआ है YouTube पे बिल्कुल निशुल्क है आगे आप यह चीज जानते हैं अपना टेलीग्राम चैनल है जहां से आप नोट्स वगैरह प्राप्त करते हैं साथ ही साथ ऐप को भी आप डाउनलोड करते चलेंगे किस लिए तो जो फ्री टेस्ट टाइम टू टाइम हम अपलोड करते रहते हैं उस टेस्ट के लिए साथ ही साथ पीडीएफ वगैरह सारा अरेंज करके वहीं
पे वेरी सून आपके एग्जाम से पहले हम लगाने वाले हैं ठीक ठीक है? टेस्ट देने का प्रक्रिया आप सभी जानते हैं। एग्जाम योद्धा ऐप डाउनलोड कर लीजिएगा और उसके बाद फ्री टेस्ट आप आराम से इसको दे सकते हैं। लेकिन कंफ्यूज नहीं करेंगे। सचिन एकडमी में भी क्लास होगा। उसका यह नहीं है कि सर वहां पे क्लास नहीं होगा। सचिन एकडमी में भी क्लास होने वाला है और वेरी सून क्लास अनाउंस हो जाएगा। हमें डेट मालूम है बट हम अनाउंस नहीं कर सकते हैं। यहां से बता नहीं सकते हैं। है ना? लेकिन वहां पे क्लास होगा। रात में सचिन सर लाइव आए थे।
आपको पता ही है। बाकी न्यूज़पेपर वगैरह कटिंग वगैरह देख के आपको सारे चीज के बारे जानकारी हो गया होगा। हालांकि आप कुछ हमारे खोठा के प्रमुख साहित्यकार का फोटो पीछे देख पा रहे हैं। है ना? लेकिन इनके अलावा इनके अलावा बहुत सारे ऐसे साहित्यकार जो आपके एग्जाम के लिए इंपॉर्टेंट हैं। उन सभी साहित्यकार के बारे में पढ़ने वाले हैं। ठीक है मेरे भाई? तो बिल्कुल धमाकेदार स्टार्ट होगा। शानदार तरीका से स्टार्ट होगा और यह क्लास कैसे चलने वाला है? तो बिल्कुल कांसेप्ट
वाला क्लास है। है ना? कांसेप्ट बताया जाएगा। पहले एक साहित्यकार का पूरा थ्योरी बताएंगे। उसके बाद फिर उस साहित्यकार के बारे में पूरा लाइन बाय लाइन जो क्वेश्चन बनता है वो क्वेश्चन बताएंगे। यानी कि एक थ्योरी पहले बता देंगे। जैसे पानुरी जी स्टार्ट कर रहे हैं तो पानुरी जी के बारे में पूरा संपूर्ण थ्योरी ज्ञान हो जाएगा और इस ज्ञान के बाद आपको पानूरी जी से संबंधित एमसीक्यू भी करवाएंगे। इसी तरह करके जितने भी खोठा के महान साहित्यकार
हुए जहां से हम हमारे एग्जाम के लिए अह क्वेश्चन पूछा जाएगा। उन सभी साहित्यकारों को एक ही क्लास में निपटाने का काम करेंगे। साथ ही साथ वैसा सभी तथ्य को हम बाहर निकालने का काम किए हैं जो कि आपके एग्जाम के लिए इंपॉर्टेंट नहीं था। नहीं तो एक-एक साहित्यकार को पढ़ने में तो एक-एक सप्ताह लगता। समझ रहे हैं? लेकिन कहने का मतलब है आपके एग्जाम के अनुरूप आपको आपके एग्जाम के डेट को देखते हुए और
इंपॉर्टेंट तथ्यों को शामिल किया गया है एज ए थ्योरी क्लास एज ए एमसीक्यू क्लास। दोनों मिलाकर के। यानी यह क्लास होने वाला है कांसेप्ट प्लस एमसीक्यू। वह भी टॉप लेवल का एमसीक्यू। इस क्लास को तैयार करने में बहुत अच्छा खासा मेहनत लगा है। बहुत मेहनत लगा है। लंबा समय टाइम भी लगा है। आप सभी को पता है। हम टाइम टू टाइम आप लोग को बताते रहें हैं। तो ये इसका जो है रिजल्ट मिलना चाहिए। इसलिए आप जरूर शेयर
करिएगा। पॉसिबल हो तो भाई जितना ग्रुप है वहां भेज दें। स्टेटस लगा सकते हैं लगा लें। लेकिन हम चाहते हैं। है ना? कि जरूर आप इसे ज्यादा शेयर करें। हम ज्यादा बोलते नहीं हैं। लेकिन जनरली आज हम कह रहे हैं कि आप इसे शेयर जरूर करेंगे। ऐसा हमें आपसे उम्मीद है। चलिए आपके सामने पहले साहित्यकार हमारे पास हैं श्रीनिवास पानुरी जी। ये श्रीनिवास पानुरी सर का क्या है? फोटो है। यानी फोटो से आप इन्हें पहचानिए। सबसे पहले फिगर से ये बड़ा करके दिखाया जाए क्या? फोटो को बताइएगा। फोटो
को अगर बड़ा करके दिखाने का प्रयास करेंगे। तो हम ऐसे दिखाएंगे आप लोगों को कि यह हमारे श्रीनिवास पानूरी जी हैं। कौन है? तो आप देखिए यहां पे यह हमारे पानुरी जी हो जाएंगे और इनको हम बड़ा कर देते हैं। ज़ूम कर देते हैं ताकि आराम से आप इसे देख सकें। और फिर पानुरी जी के बारे में तथ्यों को हम लोग समझते हुए चलेंगे। क्लियर है ये विजिबल है फोटो आपके सामने बढ़िया से ऑडियो वीडियो सब कुछ शानदार तरीका से चल रहा होगा और यह हमारे कौन हैं? तो खोठा के महान साहित्यकार
श्रीनिवास पानुरी यानी कि खोठा के वैसान खूठा जाने जब तक खोठा है तब तक पानी जी का नाम लेते रहना पड़ेगा। नहीं तो फिर खोठा और पानरी जी दोनों को अलग नहीं किया जा सकता है। जैसे दूध और पानी मिला देने के बाद दूध और पानी अलग नहीं हो सकता। वैसे खोठा और पानुरी जी को अलग नहीं किया जा सकता। समझ रहे हैं मेरी बात? तो ये कौन है? हमारे खोठा के भीष्म पितामह वाल्मीकि पानुरी जी हैं। ठीक है? तो सबसे पहले
पानुरी जी के बारे में पढ़ेंगे और फिर आगे की बात हम लोग करने वाले हैं। चलिएगा एक बार जयकारा लगा के कहेंगे सर ऑल ओके। थम्स अप करके बताइएगा कि क्लास को आगे बढ़ाया जाए। सर ठीक है। बिल्कुल देखिएगा ध्यान से समझिएगा मेरी बातों को कि श्रीनिवास पानुरी जी का जन्म बछर कहिया
भेल है तो आप सभी जानते हैं कि सर पानुरी जी का जो जन्म हुआ है वो 25 दिसंबर 1920 ईस्वी को बरवा अड्डा है ना बरवा अड्डा कहां पड़ता है तो धनबाद में पड़ता है बरवा अड्डा के धनबाद में हुआ है और इनकी माता का नाम है दुखनी देवी और पिताजी का नाम है शालिग्राम पानुरी ठीक है? ये कहां तक पढ़ाई किए हैं? तो ये मैट्रिक तक पढ़ाई करते हैं। जब इनका जन्म
इनका जन्म 19 जो 25 दिसंबर 1920 ईस्वी को होता है तो आप जान लीजिएगा याद रखेंगे खोठा के जितने भी साहित्यकार मैट्रिक पास करेंगे वो 19 साल 20 साल में पास करेंगे। यानी जब कभी भी आपको खोठा के साहित्यकार का पूछेगा कि ये फलाना साहित्यकार कब मैट्रिक पास किए हैं? है ना? किन्हीं का नाम दे के तो देखिएगा 19 साल 20 साल वाला करीब वाला ऑप्शन रहेगा तो वो उत्तर हो जाएगा। तो ये मैट्रिक कब पास किए हैं?
कहिएगा सर यह 1939 ईस्वी में किए हैं। मतलब जब इनका उम्र लगभग 19 साल था उस समय यह मैट्रिक परीक्षा पास करते हैं। साथ ही साथ आप याद रखेंगे कि पानुरी जी है ना पानुरी जी बाप के नाम जो था वो था ये शालिग्राम पानुरी और यह शालिग्राम पानुरी जो हैं वो क्या थे? खेतीबाड़ी का काम किया करते थे। बहुत बड़ा धनी व्यक्ति नहीं है। खेतीबाड़ी का काम करते थे। बहुत ज्यादा
धनी व्यक्ति नहीं थे। बात समझिएगा जो हमारे श्रीनिवास पानुरी जी हैं ये मूलता इनके जो आजा थे आजा माने दादाजी ये कहां थे तो नवादा जिला बिहार के नवादा जिला से रहने वाले लोग थे लेकिन आप जानते हैं कि लोग टाइम टू टाइम झारखंड आते रहे हैं बहुत लंबे समय से तो इनके आजा जो थे वो आ गए
बिहार से झारखंड और धनबाद के धनबाद के बरवाडा स्थान पे जो कल्याणपुर ब्लॉक है वहां पे यह ब्लॉक रहे चाहे स्थान बोलिए वहां पे क्या करने लगे रहने लगे और पुराना बाजार में इनका एक दुकान भी हुआ करता था पांडव जी का वह पानगुमटी वाला उसके बारे में भी बताएंगे लेकिन वहां से आने के बाद ये लोग यहां पे नौकरी वगैरह नहीं मिला ये क्या करते थे खेतीबाड़ी करते थे और जब कभी कोई दूसरे जगह से आ गया उठ के आएगा तो
यहां पे उनका बहुत ज्यादा संपत्ति धन भी तो रहने वाला है नहीं है ना तो कहिएगा सर खेतीबाड़ी का काम करते थे कौन इनके पिताजी ठीक है और पानुरी जी की जो पत्नी है उसका नाम है मूर्ति देवी और ये मैट्रिक पास किए हैं 1939 ईस्वी में। ठीक है? अभी तुरंत एमसीक्यू तक हम लोग पहुंचने वाले हैं। आप समझिएगा मेरी बातों को। पानुरी जी जो है लिखने की शुरुआत कब करते
हैं? तो 1946 ईस्वी में लिखने की शुरुआत करते हैं। समझिएगा क्या मामला है कि जब पानुरी जी के पिताजी का देहांत हो जाता है 1944 ईस्वी के आसपास में तब घर का जिम्मेवारी इनके ऊपर आ जाता है। तो पुराना बाजार धनबाद में जाकर के क्या करते हैं कि एक पान गुमटी खोलते हैं और उस पान गुमटी समझ रहे मेरी बात वहां पे पान गुमटी में पान बेचने के साथ-साथ जो हिंदी में कविता पाठ करते थे खूठा में भी कविता पाठ करते
थे और फिर लिखना भी चालू कर दिए यानी 1946 में लिखना चालू करते हैं। लेकिन गंभीर रूप से अगर बात करेंगे सीरियस रचना कब चालू किए तो गंभीर रूप से रचना की बात करिएगा आप कि सर गंभीर रूप से लिखना 1950 ईस्वी से किए। अब देखिएगा ध्यान से कि 1946 ईस्वी में लिखना चालू किए और इनका देहांत कब हो जाता है? तो आप कहिएगा सर 1986 ईस्वी में इनका देहांत हो जाता है। कब देहांत होता है? 7 अक्टूबर
1986 ईस्वी में इनका देहांत हो जाता है। और जब 7 अक्टूबर 1986 में इनका देहांत हो गया और 1946 में ये लिखना चालू किए थे तो कितना वर्ष तक लिखे? तो कहिएगा सर कुल मिलाकर के खोठा सेवा यानी खोठा में लिखने का काम इन्होंने 40 वर्ष तक किया। समझ रहे हैं मेरी बात? यानी 40 साल तक खोठा सेवा किए। 40 साल तक यह खोठा में लिखते रहे। कैसे कैलकुलेट कर लिए आप समझ गए? और इसी
के चलते इनको अनेक उपाधि दिया गया है। जिसमें से एक है हमारे रामदयाल पांडे जी। रामदयाल पांडे जी के द्वारा हमारे पानुरी जी को खोठा भाषा का वाल्मीकि कहा गया है। क्या कहा गया है? वाल्मीकि कहा गया है और हमारे पांडुरी जी को जो शांति भारत जी हैं शांति भारत जी हैं वह पांडुरी जी को क्या कहते हैं अक्षय बोर कह करके संबोधित करते
हैं और पांडुरी जी के याद करके श्री शांति भारत जी के द्वारा एक संस्मरण लिखा भी गया है और उस संस्मरण का नाम है बरवा अड्डा का अखयबोर क्या नाम है बरवा अड्डा का अखयबोर समझ रहे हैं अगर पूछेगा कि बरवा अड्डा का अखबोर लेकिन खरा कहल जा आपका क्या जवाब होगा कमेंट करें कि सर बरवा अड्डा का अख बोर हम लोग पानुरी जी को कहेंगे अगर पूछता है कि
बरवा अड्डा के अख बोर पानरी जी के के कहले ह तो कहिएगा सर हमारे शांति भारत जी कहे हैं समझ रहे हैं मेरी बात बताइएगा कि खोठा भाषा का जो पहला नाटक है ये लिखा किसके द्वारा गया है तो हमारे पानुरी जी के द्वारा और ये उद्भाष है ठीक है उद्भाष कर्ण और खोठा भाषा का भीष्म पितामह भी इनको कहा जाता है। और यह कहने वाले
व्यक्ति हैं हमारे विश्वनाथ दसौंधी राज जी हैं। चतुर्भुज साहू के द्वारा कहा गया है खोठा के टैगोर। यानी पूछेगा खोठा भाषा का टैगोर कौन कहते हैं? तो आप कहिएगा सर खोठा भाषा का टैगोर कहने वाले हमारे चतुर्भुज साहू हैं जो कि पांडुरी जी के लिए प्रयोग करते हैं। तुरंत अभी एमसीक्यू भी आने वाला है इनसे संबंधित। बताइएगा यह हमारा कुछ महत्वपूर्ण रचना है जो कि आपको एग्जाम में
ध्यान रखना है कि बाल किरण पूछ देगा बाल किरण किसकी रचना है? आप कहिएगा सर पानुरी जी की कविता संग्रह है। ये क्या है? पानुरी जी का कविता संग्रह है। पानुरी जी की कविता संग्रह है। और वहीं पे बोलेंगे आंखें के गीत क्या है? तो कहिएगा सर यह किताब है किस चीज का? तो कविता संग्रह का। मेघदूत है ना? मेघदूत क्या है? तो आप कहेंगे सर मेघदूत जो है काव्य है और इसको
खोठा में अनुवाद करने का काम किए हैं। यह मूल रूप से किसकी रचना थी? तो कहिएगा सर मूल रूप से यह हमारे कालिदास जी की रचना है। किसका? कालिदास कालिदास जी की रचना है जो कि संस्कृत भाषा में है। किस में है? संस्कृत भाषा में है और जुग गीता एक कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो के नाम से यह अनुवाद करते हैं और याद रखेंगे