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Episode 3/135 Docker Full Course In Hindi | Docker Container Tutorial For Beginners | – Transcript

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Video thumbnail: Episode 3/135 Docker Full Course In Hindi | Docker Container Tutorial For Beginners |
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Transcript

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हेलो एंड वेलकम मुझे मालूम है आप भीएक्साइटेड हो कि यह ओएस बेस वर्चुलाइजेशन क्या है वह समझने के लिए इस वीडियो मेंमैं आपका वह भी कांसेप्ट क्लियर कर देता हूं देखिए हम बात कर रहे हैं एरा ऑफ2013 ओके अब देखिए कंटेनर बनाना है तो उसका जो पूराप्रोसेस है वो क्या होगा इन एनी केस यह तो

हमें मालूम ही है कि भाई हार्डवेयर तोचाहिए ओके तो हार्डवेयर के बिना तो काम नहीं हो सकता तो यहां पे हमारे पास एकहोगा हार्डवेयर अब वर्चुलाइजेशन में क्या था हम सीधा हाइपरवाइजर डाल देते थे यहांपर हम हाइपरवाइजर नहीं डालेंगे हम यहां पे ओस डालेंगे तो वही यहां पर भी हमारे पासक्या होगा ओ होगा ओके अब आप ओ का मतलब है

हमसे अब इट कैन बी योर फिजिकल मशीन केअंदर ओस डाला हुआ है या वर्चुअल मशीन के ओ के अंदर ओस डाला है उसमें कोई फर्क नहींपड़ेगा अब जब हमें कंटेनर बनाना है तो इसके ऊपर हम डाल देंगे डोकर इंजन या तोडोकर डेमन आप डोकर इंजन बोलो या डोकर डेमन

बोलो कोई बात नहीं यह एक लेयर है एकसॉफ्टवेयर है जो हमें टॉप ऑफ आवर ऑपरेटिंग सिस्टम डालना पड़ेगा ओके तोयह हम डाल देंगे यहां पे इंस्टॉल कर देंगे आपको यह क्वेश्चन आया होगा कि ठीक है वोतो मैं समझ गया पर इसको मैं लाऊंगा कहां से कोई टेंशन नहीं मैं मैं आपको वो भीसमझा देता हूं देखिए जब आप

इसके बाद डोकर एंजीन के मदद से उसका डोकरसीआई होता है और डोकर सीएआई के थ्रू हम यहां पर कंटेनर बना सकते हैं तो यहां परभी कंटेनर होगा ओके जैसे यह मेरे पास कंटेनर है औरहम दो ही कंटेनर बनाते हैं मैं उसको नाम

दे देता हूंc1 और दूसरा भी एक कंटेनर बनाते हैं जिसको मैंने नाम दिया है c2 ओके अब सेम दे जैसेआपको कोई रन टाइम चाहिए तो वो रन टाइम आप टॉप ऑफ द कंटेनर डाल दो ओके डॉकर का ओएसभी होगा तो ओस कंटेनर की भी ओएस

होगी ओके यह दोनों हमारे कंटेनर है तोदोनों की ओएस होगी उसके ऊपर रन टाइम होगा ओके और उसके ऊपर आपकी जो आपको ऐपचाहिए वह होगी यह प्रोसेस सेम रहेगा इसमें

कोई चेंजेज नहीं आएगा ओके तो यह सीव जो हैवह हमारा एक कंटेनर है सेम वे यहां पर भी हमारे पास दूसरा कंटेनर है जो एकही डोकर होस्ट के अंदर चल रहा हैके मुझे मालूम है आप क्या सोच रहे हो हमइसके बारे में भी बात करेंगे पर यहां पर

दो कंटेनर है अगर इस पर्टिकुलर पार्ट कोहम कहे तो हम इसको बोलते हैं डोकर होस्ट और यहां पर हमारे कंटेनर है c1 एंडc2 अब आपका क्वेश्चन यहां पर आएगा यह सब समझ में आ गया थोड़ा सा आपने हाइपरवाइजरके ऊपर चेंजेज किया है बट द प्रॉब्लम इज

कंटेनर लाइट वेट क्योंहै राइट क्यों आप इसको लाइटवेट वर्चुअल मशीन कहते हो देखिए आपको यह तो समझ में आहोगा है तो कांसेप्ट वर्चुअल मशीन जैसा ही अब बात यहां पर अटकी है कि भाई ये लाइटवेट क्यों है ओके तो देखिए वो हमें समझना पड़ेगा सबसे पहली चीज है कि कोई भीऑपरेटिंग सिस्टम होता है ना उसके दो पार्ट है

ओके एक होता हैकर्नल और दूसरा होता है शेल ओके कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टमहै उसके दो पार्ट होते हैं कर्नल और सेल औरयह किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पे एप्लीकेबल

होता है जैसे अगर मैं आपको बताऊंकि एड की बात करें राइट तो हम क्या बोलते हैं एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल काऑपरेटिंग सिस्टम है किसने बनाया फील होता है न प्लस का यूज करो अलग फीलहोता है तो मेन चीज यहां पर क्या है कि ग

ने बनाया है या किस तरह से देखिए कोई भीऑपरेटिंग सिस्टम का एक मेन हार्ट होता है जो मेन कंपोनेंट्स है जिसको डेवलप करनाबहुत ही मुश्किल चीज है उसको बोलते हैं कर्नल और यह जो कर्नल है ना व डायरेक्टहार्डवेयर के साथ बात करता है हार्डवेयर के साथ कम्युनिकेशन करता हैहमें क्या करना है देखिए अगर मैं मोबाइल

की बात करूं तो हमें क्या करना है हमेंकैमरा को बोलना है कि यह फोटो मुझे तू लाके दे खींच के दे तो हम क्या करते हैंहम कर्नल को कमांड देते हैं और कर्नल हार्डवेयर को कमांड देते अब हम कर्नल कोकमांड कैसे देंगे हम कर्नल को कमांड देंगे थ्रू द सेल अब यह शेल दो टाइप के होते हैंकई में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस होता है कई

में कमांड लाइन इंटरफेस होता हैजैसे नक्स में ज्यादातर कमांड लाइन है और विंडोज में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस है तोहम इंटक करते एस यूजर हम बात करते हैं सेल से सेल जो है व बात करता है कर्नल से औरकर्नल बात करता है हार्डवेयर में यह मेन चीज होता हैकर्नल अब लिनक्स के कई सारे

डिस्ट्रीब्यूशन है नटू है रेड हैट है यहसबके कर्नल मोस्ट कॉमन है फर्क कहां प है शल के अंदर फर्क हैअब आपको एक क्वेश्चन यहां पर आ जाएगा कि भाई यह सब तो ठीक है पर आप यह बातें अभीहमें क्यों समझा रहे हो हमें तो यह समझना

है कि भैया यह लाइटवेट वर्चुअल मशीन क्याहै ओके तो मैं आपको यह पूरी सिस्टम को समझाता हूं देखिए जब आप यहां पर वर्चुअलमशीन बनाते हो जैसे मैंने यहां पर एक नक्स का वर्चुअल मशीन बनाया तो इस वर्चुअल मशीनके अंदर मैं बात कर रहा हूं वर्चुअल मशीन की ओके तो जब मैंने यहां पर नक्स कावर्चुअल मशीन बनाया ना तो इस वर्चुअल मशीन

के अंदर इस वर्चुअल मशीन के अंदर एक्चुअलीआपके पास दोनों चीज है क्या है आपके पास कर्नल भीहै और शेल भी है यहां पर भी आपके वर्चुअल मशीन मेंकर्नल भी है और सेल भी है यानी कि वो फुल

वर्चुअल मशीन है और वैसा ही होता हैफिजिकल मशीन में फिजिकल मशीन के अंदर भी जो भी ऑपरेटिंग सिस्टम होगा उसमें कर्नलऔर शल दोनों होगा होगा और होगा और इसीलिए आपका वर्चुअल मशीन है वो सेम है फिजिकलमशीन दे जैसा क्योंकि फिजिकल मशीन में भी कर्नल एंड वर्चुअल मशीन अ में भी कर्नल हैफिजिकल मशीन में भी सेल है वर्चुअल मशीन

में भी सेल है यहां पे जब हम डोकर की बातकरें तो यहां पे थोड़ा सा सीन अलग है वो अलग क्या है यहां पर हम जो कर्नल यूज करतेहैं ना वो अपनी मेन ऑपरेटिंग सिस्टम का करते हैं और हमारे जो कंटेनर है ना उसकेपास फुल ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है उसके पास

क्या है सिर्फ सेल है सो उसके थ्रू हमइंटरेक्ट करते हैं तो यहां पे यह है कि आपका जो कंटेनर है उसके पास शेल है औरउसका जो मेन हार्ट है वो हम एक्चुअली यहां जो मेन ऑपरेटिंग सिस्टम है उसके साथ शेयरकरते हैं क्योंकि कंटेनर के पास सिर्फ और

सिर्फ शेल है ओके इसीलिए वह काफी लाइट वेटहै कितना लाइट वेट मैं आपको बताओ अगर आप कोई विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम डालते हो तो20gb मिनिमम होता है कंटेनर काफी लाइट वेट होता है क्योंकिकर्नल होता ही नहीं है और बिकॉज ऑफ दिस

कंटेनर प्रोविजनिंग सेकंड में हो जाता हैजैसे आपको कंटेनर बनाना है एक सेकंड में कंटेनर जो है वह आप बना सकते हो कंटेनर जोहै वह शेयर होगा सॉरी कंटेनर जो है यहां पर शेयर करेगा कर्नल ऑफ मेन ऑपरेटिंगसिस्टम ऑफ मेन डकर होस्ट जब यहां पर आप बात करते हो तो यहांपर दो वर्चुअल मशीन है यह दो वर्चुअल मशीन

क्या शेयर कर रहे हार्डवेयर यानी कि यहकांसेप्ट हो गया हार्डवेयर वर्चुलाइजेशन का यहां पर आपके जो कंटेनर है वो क्याशेयर करें ऑपरेटिंग सिस्टम का मेन कंपोनेंट जिसको हम बोलते हैं कर्नर औरइसीलिए उसको हम बोलते हैं ओएस वर्चुलाइजेशन यानी के ओएस लेवलवर्चुलाइजेशन है जिससे कंटेनर काफी लाइट

वेट होता है मेन होस का कर्नल यूज करके हीवह पूरा काम करता है और इसलिएयह यहां पर कांसेप्ट हमारा क्लियर होता है कि यह ओएस बेस वर्चुलाइजेशन है अब मुझेमालूम है कि यह समझने के बाद आपको कई सारे

सवाल दिमाग में आए होंगे नो नीड टू वरी हमस्टेप बाय स्टेप सभी सवालों के बारे में बात करेंगे जब हमारा कांसेप्ट यानी किआपका वीडियोस खत्म हो जाए सीरीज तब अगर कोई भी सवाल है तो आप 100% क् पूछेगा अभीनो प्रॉब्लम क्योंकि जब तक हम यह पूरे टॉपिक क्लियरकरेंगे आई होप आपके 100% क्वेश्चन भी

क्लियर हो चुके होंगे सी यू इन द नेक्स्टवीडियो हैव अ नाइस डे गुड बाय